नयी दिल्ली, 22 जुलाई भारतीय हॉकी की दीवार कहे जाने वाले दिग्गज गोलकीपर पीआर श्रीजेश ने कहा कि पेरिस ओलंपिक उनके करियर का आखिरी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट होगा।
श्रीजेश 26 जुलाई से शुरू होने वाले ओलंपिक खेलों के लिए मैदान पर उतरते ही भारत के लिए चार ओलंपिक खेलने वाले पहले गोलकीपर बन जायेंगे। पेरिस ओलंपिक में भारतीय टीम अपने अभियान का आगाज 27 जुलाई को न्यूजीलैंड के खिलाफ करेगी।
केरल के इस खिलाड़ी के लिए कोच्चि से तोक्यो ओलंपिक में पदक विजेता बनने की कहानी इतनी आसान नहीं रही। करियर के शुरुआत में उन्हें बलजीत सिंह, एड्रियन डिसूजा और भरत छेत्री जैसे अनुभवी गोलकीपरों के कारण टीम में जगह बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ा था।
श्रीजेश ने पेरिस से ‘पीटीआई’ को दिये विशेष साक्षात्कार में कहा, ‘‘ यह (ओलंपिक) में आखिरी टूर्नामेंट होगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह परिवार के साथ समय बिताने का मौका होगा। मैं उनकी सहूलियत के हिसाब से भविष्य की योजना बनाऊंगा क्योंकि उन्होंने इतने वर्षों से मेरे लिए बहुत त्याग किये हैं।’’
देश के लिए 328 मैच खेलने वाले इस गोलकीपर ने कहा, ‘‘ मैं कुछ भी करने से पहले बच्चों, पत्नी और माता-पिता की राय लूंगा। मैं उसके अनुसार योजना बनाऊंगा। इसके साथ ही मैं जमीनी स्तर पर काम करूंगा और भारतीय हॉकी को विकसित करने में मदद करूंगा।’’
श्रीजेश के लिए तोक्यो ओलंपिक का कांस्य पदक करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि है लेकिन वह पेरिस में इस पदक का रंग बदलना चाहते हैं। तोक्यो में भारतीय टीम ने ओलंपिक पदक के 41 साल के सूखे को खत्म किया था।
उन्होंने कहा, ‘‘जब आप प्रदर्शन करते हैं तो उम्मीदें बढ़ती हैं और यह अच्छा है, क्योंकि इससे हमें आत्मविश्वास मिलता है। इसे सकारात्मक रूप से लेना चाहिये। हमें ज्यादा दबाव लेने से बचना चाहिये। मैं निजी तौर पर बस पिछली बार से बेहतर प्रदर्शन करना चाहता हूं और इस बार पदक का रंग बदलने में मदद करना चाहता हूं।’’
चेहरे पर अकसर मुस्कान रखने वाले इस 36 साल के खिलाड़ी ने कहा, ‘‘ चार ओलंपिक में प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम होना एक बड़ा सम्मान और विशेष उपलब्धि है लेकिन बस इतना ही। अब युवाओं के मेरी जगह लेने का समय आ गया। मेरा करियर बहुत सफल रहा है और मैंने जो हासिल किया है उससे मैं संतुष्ट हूं।’’
श्रीजेश को 2021 में मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया था और वह ‘वर्ल्ड गेम्स एथलीट ऑफ द ईयर’ 2021 का पुरस्कार जीतने वाले भारत के केवल दूसरे खिलाड़ी हैं। उन्होंने 2021 और 2022 में लगातार दो बार एफआईएच का साल के सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर का पुरस्कार जीता।
श्रीजेश ने पेरिस रवाना होने से पहले स्विट्जरलैंड में प्रसिद्ध ‘ऐड्वेन्चरर’ माइक हॉर्न की देखरेख में लगे तीन दिवसीय शिविर को जीवन बदलने वाला करार दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘माइक हॉर्न कोई सामान्य व्यक्ति नहीं है। वह एक असाधारण इंसान है। वह ऐसा व्यक्ति है जिसने अपने ‘कंफर्ट जोन’ से बाहर आकर मौत का सामना किया और कई बार उस पर काबू पाया। इसलिए उसने (शिविर में) इसी तरह के काम किये। हमें अपने ‘कंफर्ट जोन’ से बाहर निकाला।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ लंबी यात्रा के बाद स्विट्जरलैंड पहुंचने पर हमें सोने का समय भी नहीं मिला। उन्होंने हमें आधे घंटे में अपने सामान के साथ शिविर के लिए निकलने का आदेश दिया। इस शिविर में हमें ‘टीम वर्क’ और एक दूसरे के सहयोग लेने के बारे में सीखने का मौका मिला। ’’
इस अनुभवी गोलकीपर ने कहा कि टीम ने तोक्यो ओलंपिक के बाद कई बदलाव देखे हैं। टीम का ध्यान अब रक्षात्मक हॉकी खेलने पर है।
उन्होंने कहा, ‘‘ अब सब कुछ बदल गया है। पिछले दो वर्षों में हमारा कोचिंग स्टाफ बदल गया है, हम ज्यादातर यूरोपीय स्टाफ के साथ अभ्यास कर रहे हैं। हमारे खेलने का अंदाज भी बदल गया है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘पिछले डेढ़ साल में हमारा मुख्य ध्यान रक्षात्मक हॉकी खेलने पर रहा है। निश्चित रूप से हमारे पास अग्रिम पंक्ति खिलाड़ी हैं जो गोल कर सकते हैं।’’
भारत को ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, अर्जेंटीना, न्यूजीलैंड और आयरलैंड के साथ कठिन पूल में रखा गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘मेरे हिसाब से यह एक अच्छा पूल है। पहले तीन मैच हमें आगे बढ़ने का मौका देते हैं। ये तीन मैच हमें ऑस्ट्रेलिया और बेल्जियम के खिलाफ आखिरी दो मुश्किल मैचों के लिए तैयार करेंगे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमारे लिए पहले तीन मैचों से अधिक से अधिक अंक जुटाना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रत्येक पूल से चार टीमें क्वार्टर फाइनल के लिए क्वालीफाई करेंगी।’’
भारतीय टीम न्यूजीलैंड के खिलाफ अपना अभियान शुरू करने के बाद अर्जेंटीना (29 जुलाई), आयरलैंड (30 जुलाई), बेल्जियम (एक अगस्त) और ऑस्ट्रेलिया (दो अगस्त) के खिलाफ खेलेगी।
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