जयपुर, दो जनवरी राजस्थान उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने कांग्रेस विधायकों के इस्तीफे के मामले में विधानसभा अध्यक्ष की ओर से हाजिर हुए महाधिवक्ता से कहा कि वह इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी से निर्देश लें।
कांग्रेस विधायकों के इस्तीफे विधानसभा अध्यक्ष डॉ जोशी के समक्ष लंबित हैं।
इस मामले में अब 16 जनवरी को सुनवाई होगी।
मुख्य न्यायाधीश पंकज मिथल और न्यायमूर्ति शुभा मेहता की खंडपीठ ने विधानसभा अध्यक्ष की ओर से पेश हुए महाधिवक्ता को निर्देश दिया कि वे इस मामले में उन (अध्यक्ष) के निर्देश लें।
याचिका दायर करने वाले और वकील के रूप में उपस्थित होने वाले भाजपा विधायक राजेंद्र राठौड़ ने विधानसभा अध्यक्ष की ओर से महाधिवक्ता एमएस सिंघवी की उपस्थिति पर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया कि यह राज्य सरकार है जो अपने लाभ के लिए विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय का दुरुपयोग कर रही है।
उल्लेखनीय है कि राठौड़ ने सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के 90 विधायकों द्वारा विधानसभा अध्यक्ष को दिये गये त्यागपत्र पर उन्हें निर्देशित करने के लिये उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की थी।
अदालत में आज बहस करते हुए राठौड ने कहा कि यह मामला सुशासन का है और चूंकि विधानसभा अध्यक्ष पिछले 90 दिनों से इस मुद्दे पर डटे हुए हैं और अभी तक कोई फैसला नहीं आया है, इसलिए अदालत का इस मामले में दखल देना जरूरी है।
न्यायमूर्ति एमएम श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति विनोद कुमार बहरवानी की खंडपीठ ने विधानसभा अध्यक्ष को नोटिस जारी किया।
उल्लेखनीय है कि 25 सितंबर को विधानसभा के 90 से अधिक कांग्रेस विधायकों ने मुख्यमंत्री के रूप में गहलोत के उत्तराधिकारी का नाम तय करने के लिए बुलाई गई विधायक दल की बैठक का विरोध करते हुए विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी को अपना इस्तीफा सौंप दिया। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के नामांकन में अशोक गहलोत सबसे आगे थे।
नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया के नेतृत्व में भाजपा नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल भी 18 अक्टूबर को मामले में विधानसभा अध्यक्ष से मिला था और मंत्रियों सहित कांग्रेस विधायकों के इस्तीफे स्वीकार करने का अनुरोध किया था।
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