नयी दिल्ली, 11 दिसंबर राज्यसभा में कांग्रेस सहित विभिन्न विपक्षी दलों ने जम्मू कश्मीर के राज्य का दर्जा खत्म करने के सरकार के कदम का विरोध करते हुए सोमवार को कहा कि वहां विधानसभा चुनाव जल्द करवाये जाने चाहिए और विस्थापित कश्मीरी पंडितों के प्रतिनिधियों को जम्मू कश्मीर विधानसभा में मनोनयन के लिए प्रावधान किया जाना चाहिए।
जम्मू कश्मीर आरक्षण (संशोधन) विधेयक और जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक पर उच्च सदन में हुई चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस विवेक तन्खा ने कहा, ‘‘जम्मू कश्मीर हमारा था, हमारा है और हमारा रहेगा।’’
उन्होंने कहा कि आज उच्चतम न्यायालय ने जो निर्णय दिया है वह जम्मू कश्मीर के लोगों की जीत है। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने अपने निर्णय में संसद द्वारा किए गये फैसलों को सही ठहराया है।
तन्खा ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने अपने फैसले में जम्मू कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने और सितंबर 2024 तक चुनाव कराने को कहा है। उन्होंने कहा कि देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने कहा था कि अनुच्छेद 370 संविधान का एक अस्थायी प्रावधान है।
उच्चतम न्यायालय ने आज अपने एक निर्णय में जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा से संबंधित अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के संसद के निर्णय को उचित ठहराया।
तन्खा ने चार जून 1948 के सरदार वल्लभभाई पटेल के एक पत्र का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि उस समय भारतीय सेना पर अत्यधिक दबाव नहीं डाला जा सकता था। उन्होंने कहा कि 1947 में पाकिस्तान के साथ सैन्य कार्रवाई को रोकने का निर्णय उस मंत्रिमंडल का था, जिसमें पटेल, बी आर आंबेडकर जैसे लोग शामिल थे, इसलिए किसी एक व्यक्ति को सार्वजनिक तौर पर गलत ठहराना उचित नहीं है।
कांग्रेस सदस्य ने कहा, ‘‘कोई भी दोषारोपण करना, वह भी किसी ऐसे व्यक्ति पर जिन्हें हमें श्रद्धांजलि देते हैं, मुझे उचित नहीं लगता। गलतियां सामूहिक रूप या व्यक्तिगत रूप से किसी से भी हो सकती हैं, किंतु 40 साल बाद दोषारोपण से हम आहत होते हैं...।’’
तन्खा ने कहा कि विधेयक में ऐसे विस्थापित कश्मीरी पंडितों के प्रतिनिधियों को जम्मू कश्मीर विधानसभा में मनोनीत करने का कोई प्रावधान नहीं किया गया है, जबकि पाक के कब्जे वाले कश्मीर से विस्थापित हुए लोगों के लिए ऐसा प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि विस्थापित कश्मीरी पंडितों के लिए विधेयक में प्रावधान नहीं होना, दुखद है।
कांग्रेस सदस्य ने कहा कि विस्थापित कश्मीरी पंडितों को इस बात का दुख है कि आज तक उनकी पीड़ाओं और व्यथाओं की कोई जांच नहीं हुई। उन्होंने कहा कि इस बारे में कोई जांच आयोग बैठाया जाना चाहिए।
इस बीच कुछ सदस्यों ने जब तन्खा को टोकने का प्रयास किया तो गृहमंत्री अमित शाह ने सभापति जगदीप धनखड़ से तन्खा को बोलने के लिए और समय देने का अनुरोध करते हुए कहा, ‘‘मैं इस बात का स्वागत करता हूं कि कांग्रेस पार्टी (विस्थापित कश्मीरी पंडितों के लिए) जांच की मांग कर रही है।’’
तन्खा ने कहा कि लोग कई बार उच्चतम न्यायालय गये, किंतु कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि विस्थापित कश्मीरी पंडितों में इस बात का बहुत दुख है कि नरसंहार की अभी तक कोई जांच नहीं हुई, कोई जांच आयोग नहीं बैठा।
चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा के सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि उन्हें यह याद दिलाते हुए कष्ट होता है कि एक दौर वह था जब उस नरसंहार के आरोपी और समर्थक ‘लालकालीन वाले’ स्वागत के साथ दिल्ली आते थे और आज वे ईडी (प्रर्वतन निदेशालय) और एनआईए (राष्ट्रीय अन्वेषण अधिकरण) के समन पर आते हैं। उन्होंने कहा कि तब की सरकार और आज की सरकार में यही अंतर है।
उन्होंने कहा कि आजादी के बहुत लंबे समय बाद जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं गृहमंत्री अमित शाह ने हिम्मत दिखायी तो अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 से जम्मू कश्मीर को मुक्ति मिली।
जारी माधव अविनाश ब्रजेन्द्र
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