नयी दिल्ली, छह फरवरी सरकार ने बृहस्पतिवार को कहा कि उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों का वेतन एवं भत्ते बढ़ाने का वर्तमान में कोई प्रस्ताव नहीं है।
कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में राज्यसभा को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा, ‘‘वर्तमान में उच्चतम न्यायालय एवं उच्चतम न्यायालयों के न्यायाधीशों का वेतन, भत्ते एवं पेंशन आदि बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।’’
उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय एवं 25 उच्च न्यायालयों के वेतन, भत्ते एवं पेंशन का निर्धारण उच्चतम न्यायालय न्यायाधीश (वेतन एवं सेवा की शर्तें) कानून 1958 तथा उच्च न्यायालय न्यायाधीश (वेतन एवं सेवा की शर्तें) अधिनियम 1954 के माध्यम से किया जाता है।
उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों का वेतन एवं भत्तों की अंतिम बार समीक्षा एक जनवरी 2016 से प्रभावी हुई थी। यह समीक्षा सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने के बाद की गयी।
भारत के प्रधान न्यायाधीश को प्रति माह 2.80 लाख रुपये जबकि उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश एवं उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीशों को प्रति माह 2.50 लाख रुपये वेतन मिलता है।
उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को प्रति माह 2.25 लाख रुपये वेतन मिलता है।
सरकार ने हाल में घोषणा की थी कि वह आठवां वेतन आयोग गठित करेगी।
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