नयी दिल्ली, तीन जुलाई राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने उस खबर पर दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है जिसमें कहा गया है कि दृष्टिबाधितों के एक स्कूल के लगभग 35 छात्र एक जर्जर इमारत में पढ़ने के लिए मजबूर हैं, जहां वास्तव में कोई आवश्यक शैक्षणिक और आवासीय सुविधाएं नहीं हैं।
पंचकुइयां इलाके में इस गैर मान्यताप्राप्त स्कूल को एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) चलाता है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने एक बयान में कहा कि माना जाता है कि इसे 1939 में लाहौर में स्थापित किया गया था, लेकिन 1947 में इसे मध्य दिल्ली में वर्तमान स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया।
आयोग ने कहा कि उसने ‘‘मीडिया में आई इस खबर का स्वत: संज्ञान लिया है कि दृष्टिबाधितों के लिए देश के सबसे पुराने स्कूलों में से एक के लगभग 35 छात्र एक जीर्ण-शीर्ण इमारत में अपने जीवन को जोखिम में डालकर पढ़ने के लिए मजबूर हैं, जहां वास्तव में कोई आवश्यक शैक्षणिक एवं आवासीय सुविधाएं नहीं हैं।
इसने कहा कि मीडिया रिपोर्ट की सामग्री अगर सच है, तो यह ‘दिव्यांग’ बच्चों और उनके शिक्षकों की सुरक्षा एवं मानवाधिकार से संबंधित गंभीर मुद्दे उठाती है।
एनएचआरसी ने कहा कि इसने दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इसने कहा कि नोटिस में कहा गया है कि स्कूल में वर्तमान स्थिति और छात्रों की शिक्षा जारी रखने तथा उनकी सुरक्षा के लिए उठाए जा रहे या प्रस्तावित कदम भी शामिल होने चाहिए।
छब्बीस जून को प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, स्कूल में 35 बच्चों के अलावा आठ शैक्षणिक और 15 गैर-शैक्षणिक कर्मचारी हैं। स्कूल में ज्यादातर छात्र दिल्ली से बाहर के हैं।
बयान में कहा गया कि स्कूल प्रबंधन ने छात्रों के जीवन पर आसन्न खतरों को देखते हुए उन्हें अन्य स्कूलों में स्थानांतरित करने के लिए दिल्ली के उपराज्यपाल और शिक्षा विभाग को भी पत्र लिखा है।
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