जरुरी जानकारी | एनएचएआई को पुनर्व्यवस्थित किया जा रहा है , आगे और सुधारों की जरूरत : गडकरी

नयी दिल्ली, 16 जून सरकार भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के पुनर्व्यवस्थित किया जा रहा है तथा इस दिशा में आगे और सुधारों की भी जरूरत है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को यह बात कही।

एनएचएआई के पास राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास, रखरखाव और प्रबंधन की जिम्मेदारी है। इनके जरिये राज्यों के बीच यात्रियों और सामान का परिवहन होता है। इस समय राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई डेढ़ लाख किलोमीटर है। यह देश में कुल सड़कों का दो प्रतिशत है। लेकिन देश के कुल यातायात का 40 प्रतिशत बोझ राष्ट्रीय राजमार्ग उठाते हैं।

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उद्योग मंडल एसोचैम द्वारा आयोजित वेबिनार को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा, ‘‘हम एनएचएआई के पुनर्गठन के लिए कदम उठा रहे हैं। प्राधिकरण में बड़े सुधारों की जरूरत है।’’

मंत्री ने कहा कि आज समय की जरूरत ऐसी परियोजनाएं तैयार करने की हैं जिनके लिए बैंकों से आसानी से कर्ज सुलभ हो सके। उन्होंने कहा कि किस तरीके से एनएचएआई ने टोल-परिचालन-स्थानांतरण (टीओटी) आधार पर 5,000 करोड़ रुपये की राजमार्ग मौद्रिकरण परियोजना तैयार की जिसके लिए सिर्फ विदेशी कंपनियां बोली लगा सकती हैं।

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उन्होंने कहा, ‘‘प्राधिकरण को छोटे 500 करोड़ रुपये के संपत्ति मौद्रिकरण पैकेज लाने के लिए विश्वास दिलाने में छह माह लगे। 5,000 करोड़ रुपये के पैकेज के लिए सिर्फ विदेशी कंपनियां बोली लगा सकती थीं, इसलिए उनसे छोटा पैकेज लाने को कहा गया।

सड़क एवं राजमार्ग क्षेत्र में निवेश अवसरों पर कोविड-19 के प्रभाव विषय पर वेबिनार को संबोधित करते हुए गडकरी ने बताया कि इसी तरह प्राधिकरण 3,000 किलोमीटर राजमार्गों के निर्माण के लिए इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण (ईपीसी) के बजाय निर्माण, परिचालन और स्थानांतरण (बीओटी) तरीका अपनाना चाहता है, लेकिन इसके लिए अभी निविदा नहीं निकाली गई है। उन्होंने याद दिलाते हुए कहका कि कैसे एनएचएआई की बीओटी आधार पर 17 परियोजनाओं के लिए कोई निविदा नहीं मिली थी।

गडकरी ने सड़क किनारे सुविधाएं स्थापित करने में देरी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार राजमार्गो। पर 2,000 पेट्रोल पंप स्थापित करने की तैयारी कर रही है।

गडकरी ने एनएचएआई द्वारा कंपनियों के साथ विवादों के निपटान के लिए और समय मांगने पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने बताया कि एनएचएआई ने 22 ऐसे मामलों में और समय मांगा है।

इसी के साथ मंत्री ने कहा कि अधिकारों के विकेंद्रीकरण और परियोजना निदेशकों तथा क्षेत्रीय अधिकारियों को 50 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं पर खुद निर्णय लेने का अधिकार दिए जाने के बावजूद एनएचएआई के अधिकारी बड़ी संख्या में मामले मुख्यालय के पास भेज देते हैं। उन्होंने कहा कि एनएचएआई में सभी स्थानांतरण डिजिटल कर दिए गए हैं।

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