नयी दिल्ली, 15 जून राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने गुजरात के कच्छ जिले में दीनदयाल पत्तन न्यास द्वारा अपने आसपास मैंग्रोव का संरक्षण करने के अधिकरण के आदेशों को पालन नहीं करने के सिलसिले में सोमवार को केंद्र सरकार एवं अन्य संबंधित पक्षों से जवाब मांगा।
न्यायमूर्ति रघुवेन्द्र एस. राठौर और विशेषज्ञ सदस्य सत्यवान सिंह गरबयाल की पीठ ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, गुजरात सरकार, गुजरात राज्य तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण और अन्य को नोटिस जारी कर दो हफ्ते के अंदर उनसे जवाब मांगा।
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अधिकरण गुजरात के कच्छ ऊंट प्रजनन संगठन की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें एनजीटी के 11 सितम्बर 2019 के आदेशों को लागू करने की मांग की गई।
पीठ ने कहा, ‘‘हमें बताया गया है कि 11 सितम्बर 2019 को दिए गए हमारे किसी भी निर्देश का पालन नहीं किया गया। प्रतिवादियों को पंजीकृत डाक से नोटिस जारी किए जाएं।’’
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पीठ ने कहा था, ‘‘मैंग्रोव को नष्ट करना न केवल वन संरक्षण कानून, 1980 और तटीय विनियमन क्षेत्र अधिसूचना, 2011 का उल्लंघन है बल्कि स्थानीय खरई ऊंट प्रजाति को उनके भोजन के सबसे बड़े स्रोत से वंचित करना भी है। इस तरह से क्षेत्र के कई सौ ऊंट प्रजनन करने वालों की आजीविका भी प्रभावित हो रही है।’’
वकील संजय उपाध्याय के माध्यम से दायर यााचिका में दावा किया गया कि ‘‘नष्ट करने की बेरोक-टोक गतिविधियों’’ से वहां काफी संख्या में पाए जाने वाले मैंग्रोव खत्म होते जा रहे हैं। इससे स्थानीय खरई ऊंटों का प्राकृतिक आवास खत्म होता जा रहा है जिससे मैंग्रोव पर निर्भर ग्रामीणों की आजीविका प्रभावित हुई है।
इसने कहा कि दीन दयाल पत्तन न्यास सीआरजेड या वन विभाग की मंजूरी के बगैर गतिविधियों को अंजाम दे रहा है जिससे मैंग्रोव को अपूरणीय क्षति हो रही है।
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