कोयंबटूर, पांच जून यूनाइटेड प्लांटर्स एसोसिएशन ऑफ सदर्न इंडिया (यूपीएएसआई) ने शुक्रवार को प्राकृतिक रबड़ (एनआर) के आयात पर न्यूनतम दो साल के लिए तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
यूपीएएसआई के अध्यक्ष एएल आरएम नागप्पन ने केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग तथा रेल मंत्री पीयूष गोयल को एक पत्र में कहा कि पिछले आठ वर्षों में कीमतों में गिरावट के कारण प्राकृतिक रबड़ क्षेत्र संकट में है। इसकी कीमतें उत्पादन लागत से काफी कम रही है, इसका कारण दक्षिण-पूर्व एशियाई क्षेत्रों से देश में सस्ते आयात में निर्बाध वृद्धि होना है।
उन्होंने दावा किया कि कोविड -19 महामारी के फैलने और परिणामस्वरूप लागू हुआ लॉकडाउन एक दोहरी मार है क्योंकि प्राकृतिक रबड़ का उत्पादन लगभग ठहर गया है और मौजूदा स्थिति इस क्षेत्र के अस्तित्व के लिए खतरा बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि देश में एक अप्रैल, 2020 को प्राकृतिक रबड़ का आरंभिक स्टॉक 3.4 लाख टन है जो लगभग छह महीने में होने वाला उत्पादन है, जो आगे आयात पर रोक लगाने की आवश्यकता की पुनरावृति करता है।
इसके अलावा, नागप्पन ने सरकार से अनुरोध किया कि प्राकृतिक रबड़ आयात निलंबन को हटाने के बाद तीन साल के लिए प्राकृतिक रबड़ आयात पर सुरक्षा शुल्क लागू किया जाए, जिसके बारे में उन्होंने कहा, घरेलू उद्योग को आयात से होने वाले नुकसान से उबरने और इस उभरते क्षेत्र को सक्षम बनने के लिए अतिरिक्त समय देगा।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक रबड़ का आयात 2008- 09के 77,762 टन से बढ़कर वर्ष 2018-19 के दौरान 5,82,351 टन हो गया है। उन्होंने कहा कि उत्पादन के प्रतिशत के बतौर वर्ष 2008-09 के नौ प्रतिशत का उत्पादन बढ़कर वर्ष 2018-19 में 89.5 प्रतिशत हो गया है। जबकि इसी अवधि के दौरान खपत का प्रतिशत 8.9 प्रतिशत से बढ़कर 48.1 प्रतिशत हो गया।
वर्ष 2018-19 के दौरान कुल आयात का 82.4 प्रतिशत हिस्सा चार देशों - इंडोनेशिया (42.2%), वियतनाम (19.7%), मलेशिया (10.7%) और थाईलैंड (9.8%) का है तथा प्राकृतिक रबड़ आयात प्रतिशत, सरकार द्वारा सुरक्षा शुल्क लगाने का मजबूत आधार बनाता है।
नागप्पा ने कहा कि संकट की भयावहता को देखते हुए, सरकार के लिए यह महत्वपूर्ण हो गया है कि कच्चे माल के संदर्भ में आत्मनिर्भरता बनाए रखने और विदेशीमु्द्रा खर्च को रोकने (जो वर्ष 2018-19 में 6,127.7 करोड़ रुपये था) के लिए प्राकृतिक रबड़ के आयात पर रोक लगाने का मजबूत फैसला करना चाहिये ताकि घरेलू प्राकृतिक रबड़ क्षेत्र को बचाया जा सके जो 13 लाख उत्पादकों को आजीविका प्रदान करने वाला क्षेत्र है।
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