मुंबई, 22 दिसंबर मुंबई की एक अदालत ने बांद्रा वर्ली सी-लिंक पर हुई एक दुर्घटना के सिलसिले में आरोपी चालक को जमानत देने से इनकार कर दिया। इस दुर्घटना में पांच लोगों की मौत हो गई थी।
अदालत ने कहा कि आरोपी चालक घटना के समय अपनी एसयूवी 80 किलोमीटर प्रतिघंटे की निर्धारित सीमा की जगह 109 किलोमीटर प्रतिघंटे की गति से चला रहा था।
अदालत ने कहा कि इसके अलावा पूर्व में तेज गति के लिए उसके नौ ई-चालान भी किए गए थे, जो प्रथम दृष्टया यह दिखाता है कि उसे इसका पर्याप्त ज्ञान था कि उसके खतरनाक कृत्य से मौत हो सकती है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वी एस गाइके ने 17 दिसंबर को एसयूवी चालक इरफान अब्दुल रहीम बिलकिया को जमानत देने से इनकार कर दिया। आदेश का विवरण बृहस्पतिवार को उपलब्ध कराया गया।
बिलकिया निर्माण व्यवसाय से जुड़ा है। वह पांच अक्टूबर को जोगेश्वरी से घर लौट रहा था और रास्ते में उसने अपनी एसयूवी से पुल पर खड़ी तीन कार और एक एम्बुलेंस को कथित तौर पर टक्कर मार दी थी। इस हादसे में पांच लोगों की मौत हो गई थी और आठ अन्य घायल हो गए थे। उसे भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों के तहत गैर-इरादतन हत्या और अन्य अपराधों के लिए गिरफ्तार किया गया है।
आरोपी ने अपने वकीलों के माध्यम से पीड़ित होने का दावा किया और आरोप लगाया कि दुर्घटना बांद्रा-वर्ली सी-लिंक और सरकारी अधिकारियों के कुप्रबंधन और लापरवाही के कारण हुई। उसकी कानूनी टीम ने अदालत को बताया कि वह पूरी व्यवस्था की विफलता का शिकार हुआ और उसे इस मामले में "फंसाया" गया है।
हालांकि, अदालत ने कहा कि दुर्घटना ‘‘सिर्फ अर्जीकर्ता के खतरनाक कृत्यों के कारण’’ हुई, क्योंकि उसने समुद्री पुल पर टोल पॉइंट से दुर्घटना स्थल तक 2.8 किलोमीटर की दूरी मात्र 92 सेकेंड में तय की।
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