नयी दिल्ली, 21 दिसंबर लोकसभा में कई दलों के सदस्यों ने बुधवार को सरकार से आग्रह किया कि मादक पदार्थ से जुड़ी समस्या को खत्म करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कार्य योजना और सख्त कानून बनाने पर विचार किया जाए।
सदन में नियम 193 के तहत ‘देश में मादक पदार्थ दुरुपयोग की समस्या और इस संबंध में सरकार द्वारा उठाये गये कदम’ विषय पर अधूरी रही चर्चा को बुधवार को आगे बढ़ाते हुए रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के सदस्य एनके प्रेमचंद्रन ने कहा कि ड्रग सिर्फ भारतीय समाज ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए बड़ी समस्या है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा कानून मादक पदार्थ की समस्या को खत्म करने के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार को राष्ट्रीय कार्य योजना के साथ सामने आना चाहिए ताकि इस मुद्दे का समाधान हो सके।
प्रेमचंद्रन ने कहा कि देश में नशामुक्ति केंद्रों को बढ़ाने पर ध्यान देने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि स्कूली पाठ्यक्रम में भी नशे के खिलाफ जागरुकता को शामिल करना चाहिए।
भाजपा की सुनीता दुग्गल ने कहा कि अब सीमा पार से ड्रोन से ड्रग भेजे जा रहे हैं, इस पर ध्यान देने की जरूरत है।
कांग्रेस के गौरव गोगोई ने कहा कि सरकार ने मादक पदार्थ माफिया के खिलाफ कार्रवाई के लिए क्या कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि सरकार को नशामुक्ति पर ध्यान देना चाहिए और खेलों को बढ़ावा देना चाहिए।
समाजवादी पार्टी के एसटी हसन ने कहा कि नशीले पदार्थों के मामलों में मृत्यु दंड तक का प्रावधान होना चाहिए और सख्त कानून बनना चाहिए।
भाजपा के मनोज तिवारी ने कहा कि ड्रग के व्यापारियों पर कड़ा शिकंजा हो, लेकिन इस नशे में फंसे लोगों के साथ पीड़ित जैसा व्यवहार हो।
ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के बदरुद्दीन अजमल ने कहा कि मां-बाप को ध्यान देना चाहिए कि कहीं उनके बच्चे नशे की चपेट में तो नहीं आ गए, अगर वे ध्यान देंगे तो इस समस्या से लड़ने में मदद मिलेगी।
बहुजन समाज पार्टी के रितेश पांडे ने कहा कि मादक द्रव्यों को देश में लाए जाने के सभी माध्यमों पर अंकुश लगाया जाना चाहिए।
भाजपा के प्रताप चंद्र षाड़ंगी ने कहा कि नशामुक्ति के खिलाफ एक केंद्रीय कानून बनाया जाना चाहिए।
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