नयी दिल्ली, चार सितंबर मध्य प्रदेश के एक अतिरिक्त जिला न्यायाधीश ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर राज्य के उच्च न्यायिक सेवा (भर्ती और सेवा शर्ते) नियम, 2017 को चुनौती दी है।
यह याचिका अक्षय कुमार द्विवेदी ने दायर की है जो इस समय राज्य परिवहन अपीली अधिकरण के चेयनमैन हैं।
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अधिवक्ता अश्विनी कुमार दुबे के माध्यम से दायर इस याचिका में कहा गया है कि न्यायिक अधिकारी की शिकायत नियम 11 के बारे में है जो अधिकारी की वरिष्ठता निर्धारित करने के लिये 100 रोस्टर अंक शामिल किये गये हैं।
इस अधिकारी ने मप्र उच्च न्यायिक सेवा नियम, 2017 के नियम 11 को निरस्त करने का अनुरोध किया है। ये नियम 13 मार्च 2018 को प्रकाशित हुये थे।
याचिका में दलील दी गयी है कि वास्तव में रिक्त स्थान आधारित रोस्टर प्रणाली का प्रावधान लागू किया गया है जबकि उच्चतम न्यायालय ने ऑल इंडिया जजेज एसोसिएशन बनाम भारत सरकार मामले में 40अंक काडर आधारित रोस्टर प्रणाली का प्रावधान किया था।
याचिका के अनुसार 40 अंक आधारित रोस्टर प्रणाली न्यायालय का बाध्यकारी निर्देश था लेकिन इसे प्राधिकारियों ने शामिल नहीं किया है।
इस न्यायिक अधिकारी का कहना है कि वह 2007 में उच्च न्यायिक सेवा में आया और उसने शीर्ष अदालत के इस निर्देश को लागू करने के लिये अनेक बार अनुरोध किया और प्रतिवेदन दिये लेकिन 15 साल बाद भी प्राधिकारियों ने इसे लागू नही किया है।
याचिका के अनुसार मप्र उच्च न्यायिक सेवा नियम, 1994 के स्थान पर 2017 के नियम बनाये गये थे ताकि इसमें रोस्टर प्रणाली शामिल की जा सके।
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