जरुरी जानकारी | विदेशी बाजारों में तेजी से ज्यादातर तेल-तिलहन कीमतों में सुधार
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. दिल्ली तेल- तिलहन बाजार में शुक्रवार को ज्यादातर तेल-तिलहन के भाव मजबूत बंद हुए। हालांकि, मांग कमजोर रहने से मूंगफली तेल तिलहन और कच्चा पामतेल (सीपीओ) के दाम पूर्वस्तर पर बने रहे।
नयी दिल्ली, पांच मई दिल्ली तेल- तिलहन बाजार में शुक्रवार को ज्यादातर तेल-तिलहन के भाव मजबूत बंद हुए। हालांकि, मांग कमजोर रहने से मूंगफली तेल तिलहन और कच्चा पामतेल (सीपीओ) के दाम पूर्वस्तर पर बने रहे।
बाजार सूत्रों ने कहा कि शिकॉगो एक्सचेंज कल रात 2 प्रतिशत मजबूत बंद हुआ था और फिलहाल यहां 4 प्रतिशत की तेजी है। मलेशिया एक्सचेंज भी 4.75 प्रतिशत मजबूत रहा और शाम का कारोबार बंद है।
सूत्रों ने कहा कि किसान बारिश और ओलों से फसल नुकसान झेलने के बाद मुआवजे के इंतजार में सरकार को अपनी फसल बेचने से कतरा रहे हैं। इससे पेराई मिलों की हालत और पस्त हो रही है।
सरसों के खपने की राह में आयातित सूरजमुखी तेल भी मुसीबत बना हुआ है जिसका जरुरत से कहीं ज्यादा आयात हो रखा है और देशी तेल तिलहन इसके भारी दवाब में हैं। इसी वजह से देश में जो सोयाबीन का अधिक मात्रा में स्टॉक है उसे किसान मंडियों में बेच नहीं रहे हैं। हालांकि कीमत न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से अधिक है लेकिन पिछले दो सालों में किसानों को इसकी अच्छी कीमत मिली हुई है जिसकी वजह से उन्हें मौजूदा कीमत पर अपनी फसल बेचना मंजूर नहीं है।
इसके उलट सरसों एमएसपी से 9-10 प्रतिशत नीचे बिक रहा है जबकि कुछ दिनों पहले यह एमएसपी से लगभग 15 प्रतिशत नीचे बिक रहा था।
सूत्रों ने कहा कि पामोलीन तेल के भाव 4-5 महीने पहले सूरजमुखी और सोयाबीन जैसे नरम तेलों से 40 रुपये नीचे हुआ करता था, लेकिन मौजूदा समय में पामोलीन, सूरजमुखी और सोयाबीन तेल के थोक भाव लगभग बराबर हो गये हैं। भले ही खुदरा कीमतों में कुछ अंतर हो। सरकार को इस बात को गंभीरता से लेकर ‘सॉफ्ट आयल’ (सूरजमुखी-सोयाबीन तेल) और ‘हार्ड आयल’ (पामोलीन) के बीच कीमत अंतर दुरुस्त करने के उपाय करने चाहिये ताकि सभी तेलों का उपयुक्त आयात सुचारु हो और आगे किसी तरह की दिक्कत न आये।
उन्होंने कहा कि नरम तेल- सूरजमुखी और सोयाबीन जब पामोलीन से सस्ते हों तो कौन सीपीओ या पामोलीन का आयात करना चाहेगा ? सीपीओ आयात करने के बाद इसका प्रसंस्करण कर रिफाइंड बनाने से इसकी लागत अधिक हो जाती है। इसी कारण मांग कम रहने के बीच सीपीओ के भाव पूर्वस्तर पर बने रहे।
सस्ते आयातित खाद्यतेल कीमतों के भारी दवाब के बीच किसानों द्वारा सस्ते में बिकवाली करने से बचने के कारण सरसों एवं सोयाबीन तेल तिलहन और बिनौला तेल में मजबूती रही जबकि मलेशिया एक्सचेंज के मजबूत रहने से पामोलीन तेल में भी सुधार आया।
शुक्रवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन - 5,075-5,175 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली - 6,750-6,810 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 16,650 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल 2,520-2,785 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 9,550 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 1,610-1,680 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 1,610-1,720 रुपये प्रति टिन।
तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 10,550 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 10,250 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 8,850 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 8,850 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 9,200 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 10,250 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 9,350 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना - 5,360-5,410 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज- 5,110-5,190 रुपये प्रति क्विंटल।
मक्का खल (सरिस्का)- 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)
(The above story first appeared on LatestLY on May 05, 2023 09:10 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

