देश की खबरें | मोदी की राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू करने मे लचीलापन दिखाने की अपील, बंगाल व दिल्ली ने चिंता जताई
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली,सात सितंबर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने में ‘‘अधिकतम लचीलापन’’ अपनाना होगा और इस बारे में सभी पक्षों की राय और सवालों को खुले मन से सुना जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा नीति किसी सरकार की नीति नहीं बल्कि देश की नीति होती है।

पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने कहा कि नीति देश के संघीय ढांचे को कमजोर करती है और फिलहाल उनके राज्य में लागू नहीं की जाएगी। वहीं दिल्ली के उनके समकक्ष मनीष सिसोदिया ने दावा किया कि नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) में इसे लागू करने का खाका नहीं है और बेहतर योजना की जरूरत है ताकि यह केवल अद्भुत विचार बनकर नहीं रह जाए।

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गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को जुलाई में मंजूरी दी थी और यह 34 साल पहले यानी 1986 में बनी शिक्षा नीति का स्थान लेगी। इसका लक्ष्य भारत को वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनाने के लिए स्कूली और उच्च शिक्षा में परिवर्तनकारी सुधार का रास्ता साफ करना है।

उच्च शिक्षा में बदलाव में राष्ट्रीय शिक्षा नीति की भूमिका विषय पर राज्यपालों के सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को डिजिटल माध्यम से संबोधित करते हुए मोदी कहा, " हमें सामूहिक रूप से सभी आशंकाओं को दूर करना होगा। जिस प्रकार के लचीली दृष्टि लेकर यह नीति आई है, उसी प्रकार अधिकतम लचीलापन हम सभी को भी इसे लागू को लेकर भी दिखाना होगा।’’

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इस सम्मेलन में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षा मंत्री, कुलपति तथा राज्यपालों ने हिस्सा लिया।

राष्ट्रपति ने कहा कि 1968 की शिक्षा नीति से लेकर इस शिक्षा नीति तक, एक स्वर से निरंतर यह स्पष्ट किया गया है कि केंद्र व राज्य सरकारों को मिलकर सार्वजनिक शिक्षा के क्षेत्र में जीडीपी के छह प्रतिशत निवेश का लक्ष्य रखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति केवल एक नीतिगत दस्तावेज नहीं है, बल्कि भारत के शिक्षार्थियों एवं नागरिकों की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है और यह 21वीं सदी की आवश्यकताओं एवं आकांक्षाओं के अनुरूप देश के लोगों, विशेषकर युवाओं को आगे ले जाने में सक्षम होगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि शिक्षा नीति किसी सरकार की नीति नहीं बल्कि देश की नीति होती है।

मोदी ने कहा कि जब किसी भी प्रणाली में इतने व्यापक बदलाव होते हैं और एक नई व्यवस्था बनाने की तरफ हम बढ़ते हैं, तब कुछ आशंकाएं होना स्वाभाविक ही हैं। हम इन सभी सवालों का जवाब देने के लिए काम कर रहे हैं।

मोदी ने उनसे अनुरोध किया कि नई शिक्षा नीति पर 25 सितंबर से पहले विश्वविद्यालयों में डिजिटल सम्मेलन करें। उन्होंने कहा कि यह शिक्षा नीति पूरे देश से प्राप्त सम्मति पर आधारित है, इसलिए गांव के शिक्षक से लेकर शिक्षाविद तक ने इसका स्वागत किया है।

मोदी ने कहा, ‘‘ हम सभी का यह सामूहिक दायित्व है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) की इस भावना को हम अक्षरश: लागू कर सकें। मेरा आप सभी से विशेष आग्रह है कि 25 सितंबर से पहले अपने राज्यों, केन्द्र शासित प्रदेशों की विश्विवद्यालयों में ज्यादा से ज्यादा इस प्रकार के डिजिटल सम्मेलन आयोजित किए जाएं।’’

उन्होंने कहा कि जब शुरूआती स्तर पर ही बच्चों को उनकी संस्कृति, , परंपरा से जोड़ा जाएगा तो शिक्षा अपने-आप ही प्रभावी होगी, सहज होगी और बालमन उससे खुद को जुड़ा हुआ पाएगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में सही मायने में बिना दबाव के, बिना अभाव के और बिना प्रभाव के सीखने के लोकतांत्रिक मूल्यों को शिक्षा व्य्वस्थाक का हिस्सा बनाया गया है। मिसाल के तौर पर संकाय को लेकर जो बच्चों पर दबाव रहता था, वो अब हटा दिया गया है।

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