ढाका, 26 मार्च प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान के नेतृत्व और 1971 की बांग्लादेश की आजादी की लड़ाई में भारतीय सेना के योगदान की सराहना की। प्रधानमंत्री मोदी ने बांग्लादेश के राष्ट्रपति अब्दुल हमीद और प्रधानमंत्री शेख हसीना के साथ देश की स्वतंत्रता की 50 वीं वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
नेशनल परेड स्क्वायर पर बांग्लादेश की आजादी की स्वर्ण जयंती पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए मोदी ने उसकी आजादी की लड़ाई में भारतीय सेना की भूमिका को याद किया और कहा कि बांग्लादेश में अपनी आजादी के लिए लड़ने वालों और भारतीय जवानों का रक्त साथ-साथ बहा था और रक्त ऐसे संबंधों का निर्माण करेगा जो किसी भी दबाव से टूटेगा नहीं।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं आज भारतीय सेना के उन वीर जवानों को भी नमन करता हूं जो मुक्ति संग्राम में बांग्लादेश के भाई-बहनों के साथ खड़े हुये थे। जिन्होंने मुक्ति संग्राम में अपना लहू दिया, अपना बलिदान दिया, और आज़ाद बांग्लादेश के सपने को साकार करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई।’’
बांग्लादेश के राष्ट्रपिता शेख मुजीबुर रहमान के सम्मान में ‘‘मुजीब जैकेट’’ पहने मोदी ने कहा कि बंगबंधु का नेतृत्व और उनकी बहादुरी ने सुनिश्चित किया कि कोई भी ताकत बांग्लादेश को दास बनाकर नहीं रह सकती।
उन्होंने कहा, ‘‘आप सभी का ये स्नेह मेरे जीवन के अनमोल पलों में से एक है। मुझे खुशी है कि बांग्लादेश की विकास यात्रा के इस अहम पड़ाव में, आपने मुझे भी शामिल किया। हम भारतवासियों के लिए गौरव की बात है कि हमें शेख मुजीबुर रहमान जी को गांधी शांति पुरस्कार देने का अवसर मिला।’’
इसी सप्ताह मुजीबुर रहमान को मरणोपरांत गांधी शांति पुरस्कार से नवाजे जाने की घोषणा हुई थी।
समारोह की शुरुआत में मोदी ने कहा, ‘‘बंधुगण, मैं आज बांग्लादेश के उन लाखों बेटे बेटियों को याद कर रहा हूं, जिन्होंने अपने देश, अपनी , अपनी संस्कृति के लिए अनगिनत अत्याचार सहे, बंगबंधु की बेटियों प्रधानमंत्री हसीना और शेख रेहाना को गांधी शांति पुरस्कार सौंपा।
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