कोलकाता, 16 अक्टूबर विशेषज्ञों ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में थोक मुद्रास्फीति में मामूली बढ़ोतरी की आशंका जताने के साथ ही सोमवार को कहा कि लंबे समय तक थोक मुद्रास्फीति में गिरावट का रुझान रहने से वृद्धि प्रभावित हो सकती है।
देश में थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति सितंबर में लगातार छठे महीने नकारात्मक दायरे में बनी रही है और खाद्य उत्पादों की कीमतें गिरने से इसमें 0.26 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने सोमवार को जारी सितंबर के थोक मुद्रास्फीति आंकड़ों में यह जानकारी दी। इसके मुताबिक, रसायनों एवं रासायनिक उत्पादों, खनिज तेल, कपड़ों, मूल धातुओं और खाद्य वस्तुओं की थोक कीमतें सितंबर, 2022 की तुलना में घटी हैं।
रेटिंग एजेंसी केयरएज की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा ने कहा कि सितंबर में थोक मुद्रास्फीति की सालाना आधार पर गिरावट करीब 0.3 प्रतिशत रही है जो अगस्त के 0.5 प्रतिशत की तुलना में कम है। उन्होंने खाद्य कीमतों में गिरावट को इस सुस्ती का श्रेय दिया।
हालांकि, सिन्हा ने कहा कि उच्च आधार के कम होते असर से वित्त वर्ष 2023-24 की दूसरी छमाही में थोक मुद्रास्फीति में ‘हल्की बढ़ोतरी’ हो सकती है। लेकिन कुल थोक मुद्रास्फीति के नीचे ही रहने के आसार हैं।
इसके साथ ही उन्होंने कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और असमान बारिश से खरीफ फसलों की पैदावार को लेकर जोखिम होने से थोक मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी की आशंका को लेकर आगाह भी किया।
भारतीय सांख्यिकी संस्थान में अर्थशास्त्री एवं प्रोफेसर अभिरूप सरकार ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आना सकारात्मक बात है लेकिन रूस और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक संघर्ष की वजह से कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ सकती हैं जिसकी मार भारत में थोक मुद्रास्फीति पर पड़ेगी।
प्रोफेसर सरकार ने थोक मुद्रास्फीति के लंबे समय तक नकारात्मक दायरे में रहने को लेकर आगाह करते हुए कहा कि यह अर्थव्यवस्था में मांग में कमी और उसकी वजह से वृद्धि में सुस्ती की तरफ भी इशारा करता है।
थोक मुद्रास्फीति इस साल अप्रैल से ही लगातार नकारात्मक दायरे में बनी हुई है। पिछले साल अगस्त में यह 10.55 प्रतिशत पर थी।
प्रेम
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