विदेश की खबरें | अमेरिका से आये ओसीआई कार्ड धारकों के साथ मुंबई हवाई अड्डे पर हुई बदसलूकी

वाशिंगटन, नौ जून ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (ओसीआई) कार्ड धारक पांच भारतीय-अमेरिकी जोड़ों के परिजनों ने आरोप लगाया है कि अमेरिका से मुंबई हवाई अड्डे पहुंचने पर आव्रजन अधिकारियों ने उनके साथ बदसलूकी की।

वंदे भारत अभियान के तहत सोमवार को पांच दंपति मुंबई हवाई अड्डे पहुंचे थे।

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कोविड-19 महामारी के प्रकोप को देखते हुए लागू प्रतिबंधों के चलते ओसीआई कार्ड धारकों में कुछ श्रेणियों के लोगों को भारत की यात्रा करने की अनुमति दी गई है।

भारतीय मूल के लोगों को ओसीआई कार्ड जारी किया जाता है और अधिकतम मामलों में उन्हें वीजा मुक्त यात्रा करने की अनुमति होती है।

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ओसीआई कार्ड धारकों के नजदीकी रिश्तेदारों ने नाम न उजागर करने की शर्त पर आरोप लगाया कि न्यूयार्क से मुंबई हवाई अड्डे पर आने के बाद सात घंटे तक आव्रजन अधिकारियों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया।

ओसीआई कार्ड धारकों के एक परिजन ने कहा, “एक अधिकारी ने उन्हें बताया कि संभवतः उन्हें देश में घुसने की अनुमति नहीं दी जाएगी और अमेरिका में भारत के वाणिज्यिक दूतावास के पास कोई अधिकार नहीं है।”

परिजन ने कहा, “वे ऐसा क्यों कर रहे हैं? विमान से इतनी दूर से आने और घर से इतने दिनों तक दूर रहने के बाद उनके साथ ऐसा किया जा रहा है? इसके अलावा जरूरत से ज्यादा समय तक हवाई अड्डे पर रहने का खतरा भी है।”

मुंबई हवाई अड्डे पर फंसे ओसीआई कार्ड धारकों ने आरोप लगाया कि हवाई अड्डे पर सात घंटे के दौरान उन्हें कुछ भी खाने पीने के लिए नहीं दिया गया।

न्यूयार्क स्थित सामाजिक कार्यकर्ता प्रेम भंडारी ने कहा, “यह चौंका देने वाली बात है कि भारतीय अधिकारी ओसीआई कार्ड धारकों के साथ ऐसा बर्ताव कर रहे हैं।’’

भंडारी ने कहा कि उन्होंने इस मामले के संबंध में मुंबई और दिल्ली में अधिकारियों से बात की है और नागर विमानन सचिव ने आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।

भंडारी ने कहा, “ओसीआई कार्ड धारकों को बताया गया कि वह भारत की यात्रा करने के मानदंडों पर खरे नहीं उतरते हैं।”

नागर विमानन सचिव पदपी सिंह खरोला को इस संबंध में सवाल भेजे गए तो उनसे कोई जवाब नहीं आया।

भंडारी ने कहा कि महामारी के दौरान भारत सरकार द्वारा उठाए गए कुछ कदमों से विश्व भर में रह रहे भारतीयों को निराशा हुई है।

उन्होंने कहा, “ऐसे फैसलों से उन्हें महसूस होता है कि सरकार उन्हें भारत माता का अंग नहीं मानती। यह वो वादा है जो हमें अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर नरेंद्र मोदी तक ने दिया है।”

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