जरुरी जानकारी | बिजली मंत्रालय ने उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली उपलब्ध कराने को नियमों में किया संशोधन

नयी दिल्ली, 26 अप्रैल सरकार ने उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली उपलब्ध कराने और राज्य की वितरण कंपनियों को मांग लागत को प्रभावी तरीके से पूरा करने में मदद के मकसद से बिजली आपूर्ति के नियमों में संशोधन किया है। बुधवार को जारी आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गयी।

विद्युत मंत्रालय ने बिजली उत्पादन की कुल लागत में कमी लाने के उद्देश्य से ‘डे-अहेड नेशनल लेवल मेरिट ऑर्डर डिस्पैच’ व्यवस्था की संशोधित संरचना को अंतिम रूप दिया है। बिजली उत्पादन की कुल लागत में कमी से अंतत: उपभोक्ताओं को बिजली की कम कीमत चुकानी होगी।

बिजली क्षेत्र में ‘मेरिट ऑर्डर’ शब्द उस रैंकिंग को बताता है। यह सीमांत लागत पर आधारित है। यानी बिजली उत्पादन में जिसकी लागत सबसे कम होगी, उसे ऊपर रखा जाता है। इस व्यवस्था में जो बिजलीघर सबसे कम दर पर बिजली उत्पादन करता है, उसे पहले आपूर्ति के लिये मौका दिया जाता है।

इस संशोधित व्यवस्था के तहत जो बिजलीघर सस्ती बिजली उत्पादित करेंगे, उस बिजली की सबसे पहले मांग पूरा करने के लिये आपूर्ति की जाएगी। इसे एक दिन पहले ही (डे अहेड) अंतिम रूप दिया जाएगा जबकि मौजूद व्यवस्था में इसे 1.5 घंटे पहले अंतिम रूप दिया जाता है।

इससे जो लाभ होगा, वह विद्युत उत्पादन करने वाले बिजलीघरों और उनके उपभोक्ताओं के बीच साझा किया जाएगा। इससे बिजली के उपभोक्ताओं के लिये वार्षिक बचत में वृद्धि होगी।

वास्तविक समय पर ‘मेरिट ऑर्डर डिस्पैच’ व्यवस्था की मौजूदा प्रणाली अप्रैल, 2019 में लागू हुई थी। इसमें तकनीकी तथा ग्रिड सुरक्षा बाधाओं से पार पाते हुए देश में उत्पादन के स्तर से संबद्ध कुल परिवर्तनशील लागत को अनुकूलतम बनाया गया।

मौजूदा व्यवस्था से अखिल भारतीय आधार पर परिवर्तनशील लागत में 2,300 करोड़ रुपये की कमी आई। इन लाभों को उत्पादकों तथा उनके लाभार्थियों के बीच साझा किया जा रहा था। इससे अंतत: उपभोक्ताओं के लिये बिजली की लागत में कमी आई।

यह संशोधित व्यवस्था सभी क्षेत्रीय इकाई तापीय बिजलीघरों और उसके बाद सभी अंतर-राज्यीय तापीय बिजलीघरों को शामिल कर मौजूदा प्रणाली के दायरे को भी बढ़ाएगा।

बयान के अनुसार, इससे राज्यों को निम्न कार्बन उत्सर्जन के साथ लागत प्रभावी तरीके से संसाधन पर्याप्तता बनाए रखने में सहायता मिलेगी।

सीईआरसी (केंद्रीय विद्युत विनियामक आयोग) आवश्यक विनियामकीय प्रक्रिया के माध्यम से ‘डे-अहेड नेशनल लेवेल मेरिट ऑर्डर डिस्पैच’ व्यवस्था लागू करेगा। इसे राष्ट्रीय स्तर पर ग्रिड-इंडिया के जरिये संचालित किया जाएगा।

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