गृह मंत्रालय ने विदेशों में फंसे भारतीयों की वापसी के लिए मानक संचालन प्रोटोकॉल जारी किया
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नयी दिल्ली, 24 मई सरकार ने कोरोना वायरस की वजह से लागू लॉकडाउन के कारण विदेशों में फंसे भारतीयों की वापसी के लिए रविवार को मानक संचालन प्रोटोकॉल (एसओपी) जारी किया और कहा कि इस सेवा के लिए उन्हें भुगतान करना होगा और गर्भवती महिलाओं के साथ ही उन लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी, जो परेशानी में हों या जिनकी नौकरी छूट गई हो।

ऐसा ही एसओपी सरकार ने उन लोगों के लिए भी जारी किया है जो भारत में फंसे हैं और विदेश यात्रा की इच्छा रखते हैं।

नवीनतम एसओपी के मुताबिक सभी यात्रियों को यह वचन देना होगा कि वे 14 दिन के अनिवार्य पृथक-वास में रहेंगे। इसमें सात दिन के संस्थागत पृथक-वास के लिए उन्हें भुगतान करना होगा और इसके बाद सात दिनों तक उन्हें घर पर पृथक रहना होगा तथा अपने स्वास्थ्य पर खुद नजर रखनी होगी।

इसमें कहा गया कि बेहद अपवाद स्वरूप और बाध्यकारी वजहों से ही घर पर 14 दिनों के पृथक-वास की इजाजत दी जा सकती है और ऐसे मामलों में आरोग्य सेतु ऐप का इस्तेमाल अनिवार्य होगा।

गृह मंत्रालय द्वारा इससे पहले पांच मई को जारी एसओपी के अनुसार संस्थागत पृथकवास के लिये 14 दिन और फिर उसके बाद घर पर पृथक-वास के लिए 14 दिन की अवधि निर्धारित की गई थी जबकि विदेश से आने वाले सभी लोगों के लिए आरोग्य सेतु ऐप अनिवार्य था।

नये एसओपी में कहा गया है कि राज्य और केंद्र शासित क्षेत्र पृथक-वास को लेकर स्थिति के आकलन के बाद अपने खुद के प्रोटोकॉल विकसित कर सकते हैं।

सरकार अभी ‘वंदे भारत मिशन’ के नाम से एक अभियान चला रही है जिसके तहत 40 से ज्यादा देशों में फंसे भारतीयों को वापस लाया जा रहा है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी नवीनतम एसओपी के मुताबिक जो लोग विदेश से भारत आना चाहते हैं उन्हें विदेश मंत्रालय द्वारा बताए गए आवश्यक विवरण के साथ उस देश में भारतीय मिशन में पंजीकरण कराना होगा।

एसओपी में कहा गया कि प्राथमिकता बेहद परेशानी झेल रहे लोगों, प्रवासी कामगारों, मजदूरों जिनकी छंटनी कर दी गई हो, वीजा अवधि के समाप्त होने का सामना कर रहे अल्पकालिक वीजा धारकों, चिकित्सा आपातस्थिति का सामना कर रहे लोगों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, जिन्हें परिवार के किसी सदस्य की मौत की वजह से भारत आना हो और छात्रों को दी जाएगी।

इसमें कहा गया कि यात्रा का खर्च यात्री को खुद उठाना होगा।

एसओपी में कहा गया कि विदेश से आने वाले सभी लोगों को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी पृथक-वास के दिशानिर्देश का पालन करना होगा।

स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशानिर्देश के मुताबिक आगमन पर हवाईअड्डों, बंदरगाहों या अन्य केंद्रों पर मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा सभी यात्रियों के तापमान की जांच की जाएगी।

जिन यात्रियों में इस दौरान लक्षण नजर आएंगे उन्हें तत्काल अलग करके स्वास्थ्य प्रोटोकॉल के मुताबिक चिकित्सा केंद्र ले जाया जाएगा।

संबंधित राज्य या केंद्र शासित सरकारों द्वारा अन्य लोगों को उपयुक्त संस्थागत पृथकवास केंद्रों पर ले जाया जाएगा।

यहां यात्रियों को कम से कम सात दिनों के लिये रखा जाएगा और इस दौरान आईसीएमआर के प्रोटोकॉल के मुताबिक उनकी स्वास्थ्य जांच की जाएगी। संक्रमित पाए जाने पर उनका इलाज किया जाएगा।

संक्रमण नहीं मिलने पर इन लोगों को घरों पर पृथक-वास में रहने को कहा जाएगा और सात दिनों तक इन्हें अपने स्वास्थ्य पर नजर रखनी होगी।

कोई लक्षण इस दौरान नजर आने पर उन्हें जिला निगरानी अधिकारी या राष्ट्रीय कॉल सेंटर (1075) पर सूचित करना होगा।

केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने कहा कि एसओपी जारी किया गया क्योंकि लॉकडाउन के पहले विभिन्न कारणों से अलग-अलग देशों में गए भारतीय फंस गए हैं।

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