देश की खबरें | सैन्य कमांडरों ने सम्मेलन के तीसरे दिन मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा की
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नयी दिल्ली, 29 मई भारतीय सेना के शीर्ष नेतृत्व ने यहां कमांडरों के तीन दिवसीय सम्मेलन के अंतिम दिन देश में मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों से संबंधित विभिन्न आयामों पर चर्चा की।

सेना ने एक संक्षिप्त बयान जारी किया, लेकिन आयोजन में चर्चा से संबंधित विशिष्ट मुद्दों का उल्लेख नहीं किया।

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शीर्ष सैन्य कमांडरों का यह सम्मेलन साल में दो बार होता है।

आधिकारिक सूत्रों ने हालांकि कहा कि इस सम्मेलन में प्रमुख ध्यान पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के सैनिकों के बीच जारी गतिरोध पर रहा।

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उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त कर इसे दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित किए जाने के बाद वहां की स्थिति पर भी इस सम्मेलन में गहन चर्चा की गई।

सेना ने कहा, ‘‘तीन दिन तक, भारतीय सेना के शीर्ष नेतृत्व ने मौजूदा और उत्पन्न हो रही सुरक्षा चुनौतियों से संबंधित विभिन्न आयामों पर चर्चा की।

सूत्रों ने बताया कि भारतीय सेना के नेतृत्व ने निर्णय किया कि भारतीय सैनिक पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग त्सो, गलवान घाटी, देमचोक और दौलत बेग ओल्डी जैसे सभी विवादित क्षेत्रों में आक्रामक हाव-भाव लगातार बरकरार रखेंगे और चीन के किसी भी दबाव में नहीं आएंगे।

उन्होंने कहा कि भारत संवेदनशील क्षेत्रों में लंबी तैयारी के लिए तैयार है और वह वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर यथास्थिति बनाए रखने पर जोर देगा।

ऐसा कहा जा रहा है कि चीनी सेना ने पैंगोंग त्सो क्षेत्र और गलवान घाटी में लगभग 2,500 सैनिक तैनात कर दिए हैं तथा वह धीरे-धीरे अस्थायी अवसंरचना और अस्त्र प्रणाली को मजबूत कर रहा है।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि उपग्रह से ली गई तस्वीरों से पता चलता है कि चीन ने एलएसी पर अपनी तरफ रक्षा अवसंरचना को महत्वपूर्ण ढंग से मजबूत किया है और पैंगोंग त्सो क्षेत्र से लगभग 180 किलोमीटर दूर एक सैन्य हवाईअड्डे पर निर्माण गतिविधियों को अंजाम दे रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत भी अतिरिक्त सैनिक और तोपें भेजकर अपनी उपस्थिति मजबूत कर रहा है।

सेना ने कहा कि तीन दिवसीय सम्मेलन में अन्य जिन मुद्दों पर चर्चा हुई, उनमें मानव संसाधन प्रबंधन मुद्दे और सैन्य प्रशिक्षण निदेशालय का सैन्य प्रशिक्षण कमान मुख्यालय के साथ विलय जैसे मुद्दे शामिल रहे।

कमांडरों का यह सम्मेलन पहले 13 से 18 अप्रैल तक होना था, लेकिन कोरोना वायरस महामारी के चलते यह स्थगित हो गया था। यह सम्मेलन साल में दो बार अप्रैल और अक्टूबर में होता है।

सम्मेलन का दूसरा चरण 24 से 27 जून तक आयोजित होगा।

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