विदेश की खबरें | भाड़े के सैनिकों का विद्रोह: सत्ता पर रूसी राष्ट्रपति की पकड़ को लेकर उपजे संदेह पर यूरोपीय संघ ने सावधान किया
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या वैगनर समूह के लड़ाके बेलारूस सीमा पर खुद को खड़ा कर सकते हैं। लक्जमबर्ग में वार्ता के दौरान यूरोपीय संघ के कुछ विदेश मंत्रियों ने वैगनर समूह के नेता येवगेनी प्रीगोझिन के नेतृत्व में हुए अल्पकालिक विद्रोह का संबंध खुद पुतिन द्वारा तैयार किये गये राक्षस से जोड़ा है।

लेकिन कई अन्य लोग इस बात से चिंतित हैं कि उनके इस कदम को रूस की मदद के रूप में देखा जा सकता है और उन्हें यह कहते हुए पीड़ा हो रही है कि विद्रोह रूस का अंदरूनी मामला है।

हालांकि, कई सवाल अनुत्तरित हैं जिनमें प्रिगोझिन के सटीक ठिकाने से जुड़ा सवाल भी शामिल है। यह भी प्रश्न है कि क्या वह सैनिकों को अपने साथ ले जा सकते हैं।

काफी लोग इस बात पर सहमत होते दिखे कि इस घटना को लेकर यूरोप के सुरक्षा निहितार्थ हैं और सबसे अहम चीज यूक्रेन की मदद करना है ताकि हालात का फायदा उठाया जा सके।

जर्मनी की विदेश मंत्री एनालेना बेयरबॉक ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम इसका सावधानीपूर्वक विश्लेषण कर रहे हैं। इसमें जोखिम भी शामिल है जिसका हम अब भी आकलन करने में समर्थ नहीं हैं। हम यरोपियों के लिए केवल एक चीज मायने रखती है और वह है यूक्रेन की मदद करना।’’

बैठक की अध्यक्षता करने वाले यूरोपीय संघ की विदेश नीति के प्रमुख जोसेप बोरेल ने कहा कि पुतिन ने वैगनर के साथ जिस राक्षस को खड़ा किया था वह उनके ही खिलाफ साबित हो रहा है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक प्रणाली कमजोरी को दर्शाती है और सैन्य ताकत दरक रही है।

बोरेल ने कहा कि यह वक्त यूक्रेन को अब तक दिये गये समर्थन से और अधिक समर्थन देने का है।

ऑस्ट्रियाई विदेश मंत्री अलेक्जेंडर शालेनबर्ग ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘पुतिन उन भूतों से छुटकारा नहीं पा सकते जिन्हें उन्होंने खुद बुलाया है और वे अब उन्हें सताएंगे।’’ उन्होंने विद्रोह को इस बात का सबूत बताया कि ‘सत्ता ढांचे में दरारें’ आ गई हैं।’’

हालांकि, रूस के सियासी या सैन्य नेताओं ने हालात के बारे में अभी कोई टिप्प्णी नहीं की है। वैगनर सैनिकों ने यूक्रेन युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और उन्होंने पूर्वी शहर बखमुत (ऐसा क्षेत्र जहां सबसे खूनी और सबसे लंबी लड़ाई हुई) पर कब्जा कर लिया है।

लेकिन प्रिगोझिन ने सैन्य अधिकारियों की आलोचना करते हुए उन पर अक्षम होने और उनके सैनिकों को युद्ध सामग्री से वंचित करने का आरोप लगाया है।

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