देश की खबरें | दिल्ली के अस्पतालों में केवल दिल्लीवालों के इलाज के आदेश के खिलाफ कई याचिकाएं दाखिल
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नयी दिल्ली, आठ जून दिल्ली के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में केवल राष्ट्रीय राजधानी के निवासियों को ही भर्ती करने के दिल्ली सरकार के आदेश को चुनौती देते हुए चार अलग-अलग याचिकाएं सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय में दाखिल की गयी ।

याचिकाओं में आप सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सात जून के आदेश को असंवैधानिक, मनमाना, इंसानियत के खिलाफ और रिहायश के आधार पर नागरिकों से भेदभाव वाला बताते हुए इसे खारिज करने का अनुरोध किया गया है।

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वकील अभय गुप्ता और प्रशांत अरोड़ा तथा विनीत कुमार ने वकील प्रवीण चौहान के जरिए दो याचिकाएं दाखिल की है । दोनों याचिकाएं मंगलवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है ।

वकील गौतम कुमार और कानून के छात्र गौरव सरकार ने अपने वकील शास्वत आनंद और सैयद सरफराज करीम के जरिए याचिका दाखिल की है । इसके अलावा अर्थशास्त्री अभिजीत मिश्रा की याचिका पर बुधवार को सुनवाई होने की संभावना है ।

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अर्थशास्त्री अभिजीत मिश्रा द्वारा दायर याचिका में दिल्ली सरकार के आदेश को रद्द करने और दिल्ली सरकार को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वह यहां के अस्पतालों में सभी को इलाज मुहैया कराए।

अधिवक्ता पायल बहल के जरिये दायर की गई इस याचिका में कहा गया है कि दिल्ली सरकार का फैसला “बेहद भेदभाव पूर्ण” है और इससे भारत के नागरिकों के बीच भेदभाव पनपेगा।

सभी चारों याचिकाओं में दिल्ली सरकार के सात जून के आदेश को चुनौती दी गयी है ।

गुप्ता और अरोड़ा ने अपनी याचिका में कहा है कि सरकार का आदेश जनता के स्वास्थ्य के बुनियादी अधिकारी का सरासर उल्लंघन है।

बहरहाल, सामाजिक कार्यकर्ता कुलबीर सिंह ने भी स्वास्थ्य क्षेत्र में कुप्रबंधन पर गौर करने के लिए एक निगरानी समिति गठित करने को लेकर निर्देश देने का अनुरोध किया है ।

वकील ललित वलेचा और मनु प्रभाकर के जरिए दाखिल याचिका में दिल्ली सरकार को बिना किसी रोकटोक के निजी प्रयोगशालाओं को कोविड-19 की जांच करने की अनुमति देने के लिए निर्देश देने का आग्रह किया गया है ।

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