नयी दिल्ली, आठ जून भारत में 75 दिन के लॉकडाउन के बाद सोमवार को कई हिस्सों में मॉल, प्रार्थना स्थल और दफ्तर खुले, लेकिन लोगों की संख्या सीमित रही और परिसर की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया गया ।
देश में तेजी से बढ़ते कोरोना वायरस के मामलों के बीच मॉल, प्रार्थना स्थल और दफ्तर तो खोल दिए गए लेकिन क्या करना और क्या नहीं करना है, इसकी एक सूची है जिसमें साफ- सफाई, शरीर के तापमान की जांच, स्वच्छता टनल, टोकनों के आधार पर प्रवेश और मंदिर में प्रसाद नहीं दिया जाना शामिल है। हालांकि, इन प्रतिष्ठानों को निषिद्ध क्षेत्र के बाहर के इलाकों में खोला गया है। देश में 25 मार्च से लॉकडाउन लागू था।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, कोरोना वायरस के मामले 2.56 लाख से ज्यादा हो गए हैं और करीब 7200 लोगों लोगों की मौत हुई है। गैर निषिद्ध क्षेत्रों में लॉकडाउन चरणबद्ध तरीके से खोला गया, कई मॉल में 25 मार्च के बाद पहली बार दुकानें खुलीं लेकिन लोग नदारद रहे।
दिल्ली के सेलेक्ट सिटी मॉल में दुकान सहायकों ने दुकान में सामानों को व्यवस्थित किया। उन्होंने ग्राहकों के लिए “ हमें आपकी कमी खली, हम आपका स्वागत करते हैं“ जैसे बोर्ड लगाए लेकिन कुछ ही लोग मॉल में पहुंचे और वे भी काम के सिलसिले में, फालतू घूमने नहीं।
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कुछ रेस्तरां खुले, लेकिन वेटरों ने फेस शील्ड (चेहरे पर शीशा) लगाया हुआ था, और ग्राहक भी मेज पर मास्क लगा कर एक- दूसरे से सुरक्षित दूरी पर बैठे थे। कुछ रेस्तरां पर ग्राहकों को मेनू की डिजिटल प्रति दी गई।
उधर, केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के तहत केंद्रीय तौर पर संरक्षित 820 स्थलों को खोलने को मंजूरी दे दी।
दिल्ली, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक समेत देश के कई हिस्सों में मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे और गिरजाघरों के दरवाजे काफी वक्त बाद खुले, लेकिन सामाजिक दूरी के नियम के मद्देनजर श्रद्धालुओं का प्रवेश समिति संख्या में रखा गया। कुछ स्थानों पर मंदिर की घंटियों को कपड़े से लपेटा गया था।
सरकार ने पिछले हफ्ते निषिद्ध क्षेत्रों से बाहर के हिस्सों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की थी। कोविड-19 को फैलने से रोकने के लिए उसका सख्ती से पालन जरूरी बनाया गया है। एसओपी परामर्श था और अंतिम फैसला राज्यों पर छोड़ा गया था।
इसलिए महाराष्ट्र, तमिलनाडु और झारखंड ने मॉल और प्रार्थना स्थलों को बंद रखने का निर्णय किया है, वहीं कुछ राज्यों ने पाबंदियों में ढील देने का निर्णय किया।
दिल्ली में ऐतिहासिक जामा मस्जिद और अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में श्रद्धालुओं को लंबे समय के बाद प्रवेश दिया गया। तिरूपति प्रख्यात भगवान वेंकटेश्वर के मंदिर में तीन दिनों का परीक्षण शुरू हुआ। मंदिर के एक अधिकारी ने ‘पीटीआई-’ को बताया कि दो हजार से अधिक वर्ष पुराने मंदिर में करीब छह हजार कर्मचारियों को ‘दर्शन’ की इजाजत दी गई।
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