नयी दिल्ली, सात अक्टूबर दूरसंचार नियामक ट्राई के पूर्व चेयरमैन आर. एस. शर्मा ने कृत्रिम मेधा (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस-एआई) से जुड़ी ‘एल्गोरिद्म पक्षपात’ समेत विभिन्न मुदृों के समाधान के लिए बुधवार को एक कानूनी ढांचे की जरूरत बतायी। उन्होंने डेटा माइनिंग के नियमन और इसके लिए व्यापक सिद्धांतों को ‘प्राथमिकता’ से तय करने की बात कही।
शर्मा रेज 2020 शिखर सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने डेटा सुरक्षा को मजबूत बनाने और जल्द से जल्द डेटा सुरक्षा से जुड़ा कानून बनाने की जरूरत पर जोर दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘जितना जल्दी यह आएगा, उतना बेहतर होगा। यह बहुत महत्वपूर्ण है, साथ ही साथ हमारे पास अन्य सिद्धांत आधारित कानूनी नियमन होने चाहिए जो बहुत सख्त ना हो लेकिन स्पष्ट हों।’’
शर्मा ने कहा कि उनका दृढ़ विश्वास रहा है कि कानूनों नवोन्मेष में अड़चन पैदा करने वाला नहीं होना चाहिए। बल्कि व्यापक तौर पर बाजार के विफल होने पर तुरंत ‘प्रक्रिया’ करने वाला होना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि एआई से जुड़ी चिंताओं की पूरी श्रृंखला के समाधान के लिए एक कानूनी ढांचा होना चाहिए। इस कानूनी ढांचे को डेटा के उपयोग से पहले उपयोक्ता की रजामंदी, एल्गोरिद्म के माध्यम से पक्षपात करने और डेटा माइनिंग (आंकड़ों की खोज-खबर लेना, विश्लेषण करना) जैसी चिंताओं का समाधान करना चाहिए।
शर्मा ने इनमें से कुछ के लिए प्राथमिकता के साथ सिद्धांत तय करने की बात कही।
उदाहरण देकर उन्होंने कहा कि जैसे रोबोटिक्स के क्षेत्र में सिद्धांत सुनिश्चित किया गया है कि रोबोटों को इंसानों को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। इसलिए एआई के इर्द-गिर्द वाली चिंताओं को दूर करने और सृजित होने वाले डेटा के उपयोग के लिए एक कानूनी ढांचे की जरूरत है।
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