Eid Ki Namaz Ka Tarika: ईद-उल-फितर का त्योहार पूरी दुनिया में हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है. इस दिन की सबसे महत्वपूर्ण इबादत ईद की नमाज है, जो आमतौर पर सुबह के समय ईदगाह या बड़ी मस्जिदों में जमात के साथ अदा की जाती है. ईद की नमाज साल में दो बार (ईद-उल-फितर और ईद-उल-अजहा) पढ़ी जाती है, इसलिए इसकी विधि सामान्य पांच वक्त की नमाज से थोड़ी अलग होती है. इसमें छह अतिरिक्त 'तकबीरें' (अल्लाह-हु-अकबर कहना) शामिल होती हैं.
नमाज से पहले की जरूरी तैयारियां
ईद की नमाज के लिए जाने से पहले कुछ सुन्नतों का पालन करना बेहतर माना जाता है. इसमें गुसल (स्नान) करना, साफ या नए कपड़े पहनना, खुशबू लगाना और ईदगाह जाने से पहले कुछ मीठा (जैसे खजूर) खाना शामिल है. साथ ही, नमाज से पहले 'सदका-ए-फित्र' (दान) अदा करना अनिवार्य है ताकि गरीब लोग भी खुशी में शामिल हो सकें.
पहली रकात की विधि
ईद की नमाज दो रकात होती है. सबसे पहले ईद की नमाज की नियत की जाती है. इमाम के 'अल्लाह-हु-अकबर' कहने के बाद हाथ बांधकर 'सना' पढ़ी जाती है. इसके बाद इमाम तीन अतिरिक्त तकबीरें कहते हैं.
पहली दो तकबीरों में हाथ कानों तक उठाकर छोड़ दिए जाते हैं, जबकि तीसरी तकबीर के बाद हाथों को नियत की तरह बांध लिया जाता है. इसके बाद इमाम सूरह फातिहा और कुरान की कोई अन्य सूरत पढ़ते हैं और सामान्य नमाज की तरह रुकू और सजदा मुकम्मल किया जाता है.
दूसरी रकात और अतिरिक्त तकबीरें
दूसरी रकात के लिए खड़े होने के बाद इमाम पहले किरत (सूरह फातिहा और अन्य सूरत) करते हैं. रुकू में जाने से ठीक पहले इमाम फिर से तीन अतिरिक्त तकबीरें कहते हैं. इन तीनों तकबीरों में हाथ कानों तक उठाकर छोड़ दिए जाते हैं.
चौथी तकबीर पर बिना हाथ उठाए सीधे रुकू में जाया जाता है. इसके बाद सजदा और अत्तहियात पढ़कर नमाज पूरी की जाती है. नमाज के बाद इमाम 'खुतबा' (धार्मिक उपदेश) देते हैं, जिसे सुनना वाजिब (जरूरी) माना जाता है.
नमाज के बाद के शिष्टाचार
नमाज और खुतबे के समापन के बाद लोग एक-दूसरे से गले मिलकर ईद की मुबारकबाद देते हैं. सुन्नत के अनुसार, ईदगाह जाने के लिए जिस रास्ते का इस्तेमाल किया गया हो, वापसी में रास्ता बदल देना चाहिए. यह दिन आपसी भाईचारे, क्षमा और मानवता की सेवा का संदेश देता है.













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