देश की खबरें | जम्मू कश्मीर के रियासी में वैष्णो देवी मार्ग पर भूस्खलन; एक की मौत, कई लोग घायल

जम्मू, 21 जुलाई जम्मू कश्मीर के रियासी जिले में वैष्णो देवी मंदिर जाने वाले पुराने मार्ग पर सोमवार को भारी भूस्खलन हुआ, जिससे एक तीर्थयात्री की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि कटरा शहर में हुई तेज बारिश से भूस्खलन हुआ, जिसकी वजह से एक ‘बुकिंग’ कार्यालय और उसके ऊपर बना लोहे का ढांचा ढह गया।

एहतियात के तौर पर मंदिर तक यात्रा दोपहर एक बजे तक स्थगित कर दी गई है।

यह घटना सुबह लगभग साढ़े आठ बजे बाणगंगा के पास गुलशन का लंगर में हुई। यह यात्रा का प्रारंभिक बिंदु है।

माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के कार्यवाहक मुख्य कार्यकारी अधिकारी और जम्मू के जिलाधिकारी सचिन कुमार वैश्य ने संवाददाताओं को बताया, "भूस्खलन के कारण तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए और सात अन्य को मामूली चोटें आईं। सभी घायलों को बचा लिया गया और उन्हें अस्पताल ले जाया गया।"

वैश्य घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि बचाव एवं मलबा हटाने का कार्य जारी है।

अधिकारियों ने बताया कि गंभीर रूप से घायल चेन्नई निवासी उप्पन (70), उनकी पत्नी के. राधा (66) और हरियाणा निवासी राजिंदर भल्ला (70) को नारायण अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि उत्तर प्रदेश निवासी लीला रायकवार (56) का कटरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज किया जा रहा है।

अधिकारियों ने बताया कि गंभीर रूप से घायल एक तीर्थयात्री की मौत हो गई।

जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने घटना पर दुख व्यक्त किया और कहा कि वह स्थिति पर नजर रख रहे हैं।

सिन्हा ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, "श्री माता वैष्णो देवी मंदिर में हुए दुखद भूस्खलन की घटना से मुझे गहरा दुख हुआ है, जिसमें दुर्भाग्यवश एक श्रद्धालु की जान चली गई। श्राइन बोर्ड को घायल श्रद्धालुओं को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा और सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया गया है। मैं स्थिति पर लगातार नजर रख रहा हूं।"

अधिकारियों ने बताया कि महाराष्ट्र निवासी सुरेश कुमार (66) और दो स्थानीय लोगों निखिल ठाकुर (26) और विक्की शर्मा को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज कराने के बाद ठाकुर ने फोन पर 'पीटीआई-' को बताया, ‘‘मैं बुकिंग कार्यालय के अंदर था, तभी ऊपर लोहे के ढांचे पर पत्थर गिरने लगे। हमें भूस्खलन का खतरा महसूस हुआ, तो हमने दूसरों को सतर्क किया और बाहर भाग निकल आए।”

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