संयुक्त राष्ट्र, पांच जून भारत ने संयुक्त राष्ट्र में डिजिटल पहल के माध्यम से गरीबों और कमजोरों की जरूरतों को प्राथमिकता देने का आह्वान करते हुए इस बात पर जोर दिया कि कोविड-19 महामारी के कारण उत्पन्न हुई समस्यों ने प्रौद्योगिकी और जन-केंद्रित समाधान को राष्ट्र विकास के प्रतिमान का एक महत्वपूर्ण घटक बनाने की जरूरत को रेखांकित किया है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजनयिक टी. एस. त्रिमूर्ति ने पद संभालने के बाद बृहस्पतिवार को अपने पहले जन संबोधन में कहा कि वैश्विक महामारी कोविड-19 से स्वास्थ्य संकट उत्पन्न हो गया है, जो की एक आर्थिक, सामाजिक और मानवीय संकट में तब्दील हो गया है।
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त्रिमूर्ति ने 2020 संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) कार्यकारी बोर्ड के बृहस्पतिवार को वार्षिक अधिवेशन में कहा, ‘‘ इसकी कल्पना करना भी मुश्किल है कि जो डिजिटल उपकरण आज हमारे पास मौजूद हैं उसके बिना विश्व ने कोविड-19 के कारण उत्पन्न हुई समस्याओं का सामना कैसे किया होता। इसलिए प्रौद्योगिकी और डिजिटल जन-केन्द्रित समाधान हमारे विकास प्रतिमान का एक महत्वपूर्ण घटक होने चाहिए।’’
त्रिमूर्ति ने पिछले महीने ही अपना कार्यभार संभाला था।
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उन्होंने कहा, ‘‘ डिजिटल समाधानों के माध्यम से गरीबों की जरूरतों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ हमें इस कोविड-19 संकट के परिणामों को कम करने के लिए, साथी देशों की नई विकास प्राथमिकताओं के अनुसार, यूएनडीपी की प्राथमिकताओं को फिर से प्रमुखता से पेश करने की जरूरत है।’’
ऐसे में जब 2030 विकास एजेंडा, राष्ट्रों के लिए दीर्घकालिक लक्ष्य बना हुआ है, राजनयिक ने कहा कि यह संभव है कि देशों के लिए अल्पकालिक और यहां तक कि मध्यम अवधि की प्राथमिकताएं थोड़ा भिन्न हो सकती हैं, हालांकि जरूरी नहीं कि यह विरोधाभासी हो।
उन्होंने कहा, ‘‘ यूएनडीपी को भागीदार देशों की प्राथमिकताओं के बदलते प्रारूप के प्रति तुरंत प्रतिक्रिया देनी चाहिए।’’
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