देश की खबरें | कोविड-19 एक ‘ सुधारक’ भी है जो जीवन को नया मकसद देने की जरूरत को रेखांकित करता है: नायडू

नयी दिल्ली, 12 जुलाई उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने रविवार को कहा कि कोविड-19 महामारी को केवल एक आपदा के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए बल्कि एक ‘‘सुधारक’’ के तौर पर भी देखा जाना चाहिए जो हमें ‘‘हमारी जिंदगियों को नया मकसद’’ देने की जरूरत को रेखांकित करते हुए समाज को अगली चुनौती के लिए तैयार करने का मौका देती है।

उप राष्ट्रपति ने फेसबुक पोस्ट ‘म्यूजिंग ऑफ लाइफ इन कोरोना टाइम्स’ में लोगों से आत्ममंथन करने और इस बात का आकलन करने को कहा कि क्या उन्होंने पिछले कुछ महीने बंद रहने के दौरान सही सबक सीखे और इस प्रकार की अनिश्चितताओं से निपटने के लिए खुद को तैयार किया।

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उन्होंने कहा कि पूरे ग्रह पर केवल अपना दावा करना जैसे कि वह केवल मनुष्यों के लिए ही है, ने प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ दिया है और इससे एक अलग प्रकार की आपदा पैदा हुई है।

उन्होंने कहा,‘‘ ग्रह को हमारी जरूरत नहीं है बल्कि हमें ग्रह की आवश्यकता है।’’

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नायडू ने कहा,‘‘ हम जब पैदा हुए तो समान थे और वक्त के साथ हममें असमानताएं आती हैं। महामारी ने कुछ वर्गों की कमजोरियों को उजागर किया है जो वास्तव में उनकी खुद की वजहों से नहीं हैं। आपका रहने का तरीका दूसरों की कमजोरी बढ़ाने की एक वजह हो सकता है।’’

उप राष्ट्रपति ने कहा कि महामारी को केवल एक आपदा के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए बल्कि एक ‘‘सुधारक’’ के तौर पर भी देखा जाना चाहिए जो हमें अगली चुनौती के लिए तैयार करती है साथ ही अपने जीवन को नए मकसद देने की जरूरत को रेखांकित करती है ताकि आगे इस तरह की किसी स्थिति को रोका जा सके।

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