कोलकाता, 11 जून प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ बनाने के लिए कोविड-19 संकट को अवसर में बदला जाना चाहिए। यह समय देश को नयी ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए कड़े निर्णय लेने और साहसिक निवेश करने का है।
मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से कोलकाता में इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स (आईसीसी) के 95वें सालाना पूर्ण अधिवेशन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि देश को जिन सामान का विदेशों से आयात करना पड़ता है, उनका देश में ही विनिर्माण सुनिश्चित करने के लिए हमें कदम उठाने होंगे।
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प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘ पिछले पांच-छह साल में देश को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य देश की नीति और व्यवहार में सर्वोपरि रहा है। कोविड-19 संकट ने हमें यह समझने का मौका दिया कि कैसे इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों की गति को बढ़ाया जाए।’’
उन्होंने कहा कि यह देश की अर्थव्यवस्था को निर्देशित कर और नियंत्रण से मुक्त करके एक प्रतिस्पर्धी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला खड़ी करने के लिए ‘उद्योग लगाओ और चालू करो’ की दिशा में ले जाने का भी समय है।
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मोदी ने कहा कि जन केंद्रित, जन आधारित और जलवायु अनुकूल विकास भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के कामकाज का हिस्सा है। हाल में किसान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए किए गए निर्णयों ने देश की कृषि अर्थव्यवस्था को बरसों की गुलामी से मुक्त किया है। अब किसानों के पास देशभर में कहीं भी सामान बेचने की आजादी है।
प्रधानमंत्री ने कहा, ’’ भारत कोविड-19 संकट के साथ-साथ बाढ़, टिड्डी दल के हमले और भूकंप जैसी कई चुनौतियों से लड़ रहा है। आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए हमें संकट को अवसर में बदलना होगा। जिन सामान का हमें आयात करना पड़ता है उनका देश में ही विनिर्माण सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने होंगे।’’
स्वामी विवेकानंद का संदर्भ देते हुए मोदी ने कहा कि उन्होंने (विवेकानंद) ने एक बार लिखा था कि भारतीयों को खुद के लिए उत्पादन करना चाहिए और अन्य देशों में बाजार तलाशना चाहिए। उनकी बहुत इच्छा थी कि देश चिकित्सा उपकरणों, विनिर्माण, रक्षा विनिर्माण, कोयला एवं खनिज, खाद्य तेल और अन्य कई क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बने।
प्रधानमंत्री ने आपदा को अवसर में बदलने के देशवासियों के प्रयासों की सराहना की और कहा कि यह महामारी देश के लिए ‘परिवर्तन लाने वाला’ बिंदु है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में कई सुधारों को अमलीजामा पहनाया जा चुका है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों की परि में बदलाव, कंपनी कानून के तहत विभिन्न प्रावधानों को गैर-आपराधिक बनाना, दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता बनाना, कोयला एवं खनन क्षेत्र में अधिक प्रतिस्पर्धा लाना, कृषि उत्पाद मंडी समिति और आवश्यक वस्तु अधिनियम में बदलाव जैसे कई सुधार हुए हैं।
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