नई दिल्ली, 28 अप्रैल: दिल्ली आबकारी नीति मामले में चल रही कानूनी प्रक्रिया के बीच, आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने एक बड़ा राजनीतिक और कानूनी कदम उठाया है. मंगलवार को केजरीवाल ने पूर्व उपमुख्यमंत्री (Former Delhi Deputy Chief Minister) मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) और आतिशी (Atishi) सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की. इस दौरान उन्होंने एलान किया कि वे दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) की कार्यवाही में न तो व्यक्तिगत रूप से पेश होंगे और न ही कोई वकील उनका पक्ष रखेगा. यह भी पढ़ें: AAP नेतृत्व को आत्ममंथन की जरूरत, 7 सांसदों के पार्टी छोड़ने पर BJP का हमला
'सत्याग्रह' का रास्ता और न्याय पर सवाल
राजघाट पर मीडिया से बात करते हुए केजरीवाल ने कहा कि वे न्यायपालिका का सम्मान करते हैं, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में उन्हें गांधीजी के 'सत्याग्रह' का रास्ता चुनने के लिए मजबूर होना पड़ा है. उन्होंने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को पत्र लिखकर अपनी इस असहमति के कारणों को विस्तार से बताया है. केजरीवाल ने कहा, 'हमें अदालतों पर भरोसा है क्योंकि पहले हमें वहां से न्याय और जमानत मिली है, लेकिन अब जो हालात बने हैं, उनमें मेरे पास सत्याग्रह के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है.'
कोर्ट की कार्यवाही के बहिष्कार के दो मुख्य कारण
केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में अपने इस फैसले के पीछे दो प्रमुख कारण बताए हैं:
- वैचारिक मतभेद: केजरीवाल ने आरोप लगाया कि संबंधित जज ने खुद स्वीकार किया है कि वे आरएसएस से जुड़ी विचारधारा वाले संगठनों के कार्यक्रमों में शामिल होती रही हैं. उन्होंने कहा कि 'आप' इस विचारधारा की विरोधी है, ऐसे में उन्हें निष्पक्ष न्याय की उम्मीद नहीं है.
- हितों का टकराव (Conflict of Interest): केजरीवाल का दूसरा बड़ा आरोप है कि जज के दोनों बच्चे केंद्र सरकार के वकीलों के पैनल में काम करते हैं. उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ कोर्ट में केंद्र की एजेंसी सीबीआई केस लड़ रही है और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ही यह तय करते हैं कि जज के बच्चों को कौन से केस मिलेंगे.
कुछ परिस्थितियों के बाद सत्याग्रह का आरंभ
VIDEO | Delhi: AAP National Convenor Arvind Kejriwal says, "... The judiciary approved my bail and acquitted me in the case. If I am roaming around freely, it is because of our judiciary. Certain circumstances have arisen due to which which we are carrying out this Satyagraha. I… https://t.co/ba1QA6rdGB pic.twitter.com/HOVOi03rch
— Press Trust of India (@PTI_News) April 28, 2026
मनीष सिसोदिया ने भी जताई असहमति
केजरीवाल के नक्शेकदम पर चलते हुए मनीष सिसोदिया ने भी जस्टिस शर्मा को पत्र लिखकर कार्यवाही में शामिल न होने की बात कही है. सिसोदिया ने अपने पत्र में तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'मेरी ओर से भी कोई वकील पेश नहीं होगा. जब बच्चों का भविष्य सॉलिसिटर जनरल के हाथों में हो, तो मुझे आपसे न्याय की उम्मीद नहीं है.' यह भी पढ़ें: Assam Elections 2026: असम विधानसभा चुनाव के लिए आम आदमी पार्टी ने जारी की 14 उम्मीदवारों पहली सूची, जानें किसे कहां से मिला टिकट
आगे की कानूनी रणनीति
कार्यवाही के बहिष्कार के बावजूद केजरीवाल ने स्पष्ट किया है कि वे कानूनी विकल्पों को पूरी तरह नहीं छोड़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट जो भी फैसला सुनाएगा, उसे सही समय आने पर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का अधिकार उनके पास सुरक्षित है.
वर्तमान में आम आदमी पार्टी इस पूरे मामले को जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है, वहीं कानूनी विशेषज्ञ इस 'सत्याग्रह' के रुख को अदालती अवमानना या प्रक्रियात्मक चुनौती के नजरिए से देख रहे हैं.













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