चंडीगढ़, दस मई हरियाणा में विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने राज्य की मनोहर लाल खट्टर सरकार द्वारा हाल में घोषित फसल विविधीकरण योजना को लेकर रविवार को उस पर निशाना साधा और कहा कि अंतत: धान की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर नहीं करने के लिए बड़ी संख्या में किसानों को इस फसल की खेती करने से हतोत्साहित करने का एक षड्यंत्र है।
कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा, ‘‘नये तानाशाही आदेश एवं खट्टर सरकार द्वारा लायी गई योजना के तहत वे अब चाहते हैं कि पहचान किये गए आठ अलग- अलग प्रखंडों और कुल 19 प्रखंडों के किसान धान की खेती नहीं करें और यदि वे तब भी फसल उगाना जारी रखते हैं तो धान के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य देने से इनकार करके उन्हें दंडित किया जाए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘साथ ही वे चाहते हैं कि 26 अन्य प्रखंडों में किसानों को पंचायती भूमि पर धान की खेती करने के अधिकार से वंचित किया जाए। यह इस तथ्य के बावजूद है कि राज्य की सरकार द्वारा गत वर्ष शुरू की गई ‘जल ही जीवन योजना’ (अन्य फसल विविधीकरण योजना) को चुपके से बंद कर दिया गया।’’
सुरजेवाला ने हरियाणा कांग्रेस की अध्यक्ष कुमारी सैलजा के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया।
हरियाणा सरकार ने गत बुधवार को पानी की बचत के लिए अधिक पानी खपत वाले धान की बजाय अन्य फसल उगाने वाले किसानों को सात हजार रुपये प्रति एकड़ का प्रोत्साहन देने की घोषणा की थी। सरकार ने कहा था कि पंचायत क्षेत्रों में जहां भूजल की गहरायी 35 मीटर से अधिक है वहां धान की बुवाई की इजाजत नहीं दी जाएगी।
कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि क्या किसानों को तब धान के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं देना ही आगे का रास्ता है यदि वे ऐसे प्रखंडों में धान उगाना जारी रखते हैं।
सुरजेवाला और सैलजा ने सवाल किया, ‘‘ऐसा करके क्या किसानों का जीवन और आजीविका को इस सरकार द्वारा खतरे में नहीं डाला जा रहा है। इस योजना की सफलता की क्या गारंटी है जब उनकी ‘जल ही जीवन है’ योजना असफल हो गई?’’
सुरजेवाला ने कहा कि ‘जल ही जीवन है’ योजना के तहत राज्य के असंध, पुंडरी, रादौर और गनौर सहित सात प्रखंडों की पहचान की गई थी जहां 1.37 लाख एकड़ से अधिक पर फसल पैटर्न को धान से बदलकर मक्का सहित अन्य फसलों से बदला जाना था।
उन्होंने कहा कि किसानों को 2000 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन, मुफ्त हाईब्रिड बीज और फसल बीमा किस्त का भुगतान का वादा किया गया था लेकिन योजना असफल हो गई और किसान खाली हाथ रह गए।
उन्होंने कहा, ‘‘अब इस नयी योजना से सरकार 19 नये प्रखंडों में किसानों के जीवन और आजीविका से प्रयोग कर रही है, इनमें से दो कैथल जिले में, चार कुरुक्षेत्र और एक- एक फतेहाबाद और सिरसा जिले में पड़ते हैं। इसके अलावा 11 और प्रखंड हैं जिनके नामों की घोषणा अभी तक नहीं की गई है।’’
उन्होंने दावा किया, “इसके अलावा 26 प्रखंड हैं जिनमें से अधिकतर उत्तरी हरियाणा में हैं, जहाँ किसान अपनी खेती पंचायती ज़मीन पर करते हैं, इसे लीज़ पर लेकर धान की खेती करने से रोक दिया गया है। यह सब एक अयोग्य सरकार की ओर इशारा करता है जो अंततः न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान की खरीद को रोकने के लिए अपनी योजनाओं को पूरी तरह से आगे बढ़ा रही है, इसके पीछे मुख्य साजिश यही है।’’
उन्होंने कहा कि कांग्रेस यह नहीं कह रही है कि फसल विविधीकरण नहीं किया जाना चाहिए लेकिन ‘‘किसानों को उनकी पसंद की फसल की खेती करने के लिए जोतने से कैसे रोका जा सकता है।’’
‘मेरा पानी मेरी विरासत’ योजना के तहत किसानों को उन 19 ब्लॉक में जहां भूजल का स्तर कम हो गया है, वहां धान के 50 प्रतिशत खेती वाले क्षेत्र में विविधता लाते हुए वहां मक्का, कपास, बाजरा और दालों जैसी वैकल्पिक फसलें उगाना है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, लेटेस्टली स्टाफ ने इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया है)











QuickLY