राज्य में कम बारिश पर विधानसभा में अल्पकालिक चर्चा का जवाब देते हुए राजस्व मंत्री कृष्ण बायर गौड़ा ने कहा कि मौजूदा ‘सूखा नियमावली’ के तहत राज्य सरकार पर्याप्त राहत मुहैया नहीं करा सकेगी और उसे लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ेगा।
गौड़ा ने कहा, “ सूखा घोषित करने के लिए केंद्र के पास एक सूखा नियमावली है। पिछली नियमावली 2016 में जारी की गई थी। पहले की नियमावलियों में राज्यों के पास कुछ स्वतंत्रता थी। वर्तमान सरकार की मौजूदा नियमावली ने सूखे के मानदंड में बदलाव किया है। इसके मुताबिक, बारिश में 60 फीसदी की कमी और तीन हफ्ते की शुष्क अवधि होनी चाहिए।”
उन्होंने कहा कि इसके अलावा भूजल नमी स्तर और उपग्रह तस्वीरें जैसे मानदंड भी हैं। मंत्री के मुताबिक, जब कैबिनेट की उपसमिति ने इसे तालुकाओं पर लागू करने की कोशिश की तो मांग और पात्रता में कोई संबंध नहीं था।
गौड़ा ने कहा कि नियमावली के मुताबिक, अगर मध्यम स्तर का सूखा पड़ता है तो राज्य राहत उपलब्ध करा सकता है तथा जून-जुलाई की बारिश के आधार पर सूखा घोषित नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि कैबिनेट ने इस पर विस्तृत चर्चा की और मुख्यमंत्री सिद्धरमैया से आग्रह किया कि वह केंद्र को पत्र लिखकर सूखा नियमावली के दिशा-निर्देशों में बदलाव करने की गुजारिश करें, क्योंकि मौजूदा नियमावली ज़मीनी हकीकत से कोसों दूर हैं।
गौड़ा ने कहा, “हमने मुख्यमंत्री के माध्यम से केंद्र सरकार के लिए एक पत्र तैयार किया है जिसमें ज़मीनी हकीकत के आधार पर सूखा घोषित करने के लिए राज्य सरकार को कुछ स्वतंत्रता देने का आग्रह किया गया है। विस्तृत पत्र कुछ दिनों में भेजा जाएगा।”
हालांकि, मंत्री ने कहा कि कैबिनेट उपसमिति अगले सप्ताह तक केंद्रीय दिशा-निर्देशों के आधार पर तालुकाओं में सूखा घोषित करने पर फैसला करेगी।
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