देश की खबरें | कर्नाटक: जिला व तालुक पंचायतों के परिसीमन व आरक्षण की पुन: प्रक्रिया के लिए 10 सप्ताह की मोहलत

बेंगलुरु, 28 जून कर्नाटक उच्च न्यायालय ने बुधवार को राज्य सरकार को जिला पंचायतों और तालुक पंचायतों के परिसीमन तथा आरक्षण की प्रक्रिया फिर से निर्धारित करने के लिए राज्य सरकार को 10 सप्ताह की मोहलत दी।

महाधिवक्ता ने बुधवार को मुख्य न्यायाधीश प्रसन्ना बी. वराले की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष लंबित याचिका का उल्लेख किया और परिसीमन तथा आरक्षण सूची को फिर से निर्धारित करने से लेकर अधिसूचना जारी करने तक के लिए 10 सप्ताह की मोहलत मांगी।

उच्च न्यायालय ने महाधिवक्ता की इस दलील को अदालत को दिए गए हलफनामे (अंडरटेकिंग) के रूप में रिकॉर्ड पर लिया। इसने राज्य सरकार को 10 सप्ताह में जिला पंचायतों और तालुक पंचायतों के लिए परिसीमन और आरक्षण की आवश्यक अधिसूचनाएं प्रस्तुत करने और एक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

अदालत ने राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) को इसके बाद आवश्यक कदम उठाने का भी निर्देश दिया तथा अगली सुनवाई के लिए याचिका को 11 सप्ताह बाद सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।

एसईसी ने 2021 के अप्रैल और मई में कर्नाटक में जिला पंचायत और तालुक पंचायत चुनावों के लिए तैयारी की थी। आयोग ने निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन की कवायद पूरी कर ली थी और मतदाताओं की अंतिम सूची भी प्रकाशित कर दी थी तथा एसईसी द्वारा आरक्षण मसौदे की भी घोषणा की गई थी।

हालांकि, इससे पहले कि एसईसी चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करे, राज्य की तत्कालीन सत्तारूढ़ भाजपा सरकार ने कर्नाटक पंचायत राज और ग्राम स्वराज अधिनियम में संशोधन किया, जिसके जरिये निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन और आरक्षण सूची तैयार करने की आयोग की शक्तियां वापस ले ली गईं। इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने एक नया परिसीमन पैनल बनाया था।

सरकार के संशोधन को आयोग की ओर से उच्च न्यायालय के समक्ष दी गयी चुनौती के बाद से राज्य में जिला पंचायतों और तालुक पंचायतों के चुनाव लंबित हैं।

उच्च न्यायालय ने दिसंबर 2022 में देरी की रणनीति के लिए सरकार पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया था।

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