नयी दिल्ली, 22 जून राष्ट्रपति चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के उम्मीदवार के रूप में आदिवासी नेता द्रौपदी मुर्मू के नाम की घोषणा ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के लिए दुविधा खड़ी कर दी है कि वह देश को पहला आदिवासी राष्ट्रपति देने में अपना योगदान दे या फिर गठबंधन धर्म का पालन करे।
मुर्मू मूल रूप से ओड़िशा के मयूरभंज जिले की रहने वाली हैं और वह आदिवासी समुदाय संताल (संथाल) से ताल्लुक रखती हैं। झारखंड की राज्यपाल के रूप में उनका कार्यकाल भी निर्विवाद रहा है जबकि संयुक्त विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा का भी झारखंड से गहरा नाता रहा है।
बिहार की राजधानी पटना में जन्मे, सिन्हा हजारीबाग संसदीय सीट से चुनाव जीतकर ही केंद्र सरकार में वित्त और विदेश मंत्री बने और फिर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी एक पहचान कायम की। वह तीन बार संसद में हजारीबाग क्षेत्र से भाजपा का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं जबकि पिछले दो चुनावों में उनके पुत्र जयंत वहां से भाजपा के टिकट पर जीत दर्ज कर रहे हैं।
वर्तमान में पृथक झारखंड राज्य आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाने वाला तथा आदिवासी अस्मिता हितैषी राजनीति करने वाला झामुमो राज्य सरकार का नेतृत्व कर रहा है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अगुवाई वाली इस सरकार को कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजग) का समर्थन हासिल है।
मुर्मू की उम्मीदवारी की घोषणा के कुछ समय बाद ही आदिवासी बहुल राज्य ओड़िशा की सत्ताधारी बीजू जनता दल (बीजद) ने उन्हें समर्थन देने की घोषणा कर दी। लेकिन अभी तक इस बारे में झामुमो की कोई स्पष्ट राय नहीं आई है कि वह दलित राष्ट्रपति के रूप में राजग उम्मीदवार का समर्थन करेगा या विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार सिन्हा के साथ जाएगा।
इस बारे में जब झामुमो नेताओं से बात की गई तो उनमें से अधिकांश ने कहा कि पार्टी के लिए इस बात को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा कि मुर्मू देश की पहली आदिवासी राष्ट्रपति बनने की ओर अग्रसर हैं।
पार्टी के एक नेता ने कहा कि इस बारे में अंतिम फैसला तो पार्टी का शीर्ष नेतृत्व ही करेगा लेकिन बहुत ही कम लोगों को पता है कि मुर्मू और ‘‘दिशुम गुरु’’ यानी शिबू सोरेन के परिवार के बीच निकट संबंध हैं और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना उसी मयूरभंज जिले की हैं, जहां से मुर्मू आती हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘वैचारिक रूप से भाजपा के उम्मीदवार का समर्थन करना बेशक अटपटा लगे...लेकिन राजनीति में पहले भी ऐसा होता आया है कि स्थानीय हित वैचारिक मुद्दों पर भारी पड़ जाते हैं।’’
लोकसभा में झामुमो के एकमात्र सांसद विजय कुमर हंसदक से ‘‘’’ ने बात की तो उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति चुनाव पर पार्टी का जो भी रुख होगा, उससे जल्द ही सभी को अवगत करा दिया जाएगा।
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