श्रीनगर/नयी दिल्ली, 28 फरवरी जम्मू-कश्मीर पुलिस पीडीपी की युवा इकाई के अध्यक्ष वहीद-उर-रहमान पर्रा के फोन के इंटरनेट प्रोटोकॉल डिटेल रिकॉर्ड (आईपीडीआर) का विश्लेषण कर रही है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
पर्रा को सीमा पार के आतंकवादियों और अलगावादियों के संपर्क में रहने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
आईडीपीआर के जरिए एक फोन से की गईं कॉल और संदेशों के बारे में जानकारी मिलती है, जैसे कि किस नंबर से किस नंबर पर फोन किया गया, किस तारीख और किस समय पर कितनी देर कॉल की गई।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने कहा कि पर्रा के आईपीडीआर एवं कॉल डाटा रिकॉर्ड (सीडीआर) की पड़ताल की जा रही है। पर्रा को जम्मू-कश्मीर सीआईडी की अपराध जांच शाखा ने गिरफ्तार किया था।
पर्रा की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सोमवार को पुलिस ने श्रीनगर में विशेष एनआईए अदालत को सूचित किया था कि आरोपी के घर से जब्त फोन एवं अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को फोरेंसिक विशेषज्ञों को भेजा गया है।
अदालत को सूचित किया गया था, '' आरोपी के कुछ फोन से सीडीआर व आईपीडीआर प्राप्त किया गया है और उनका विश्लेषण किया जा रहा है। शुरुआती विश्लेषण के दौरान यह पाया गया कि पर्रा के सीमा पार से संपर्क थे जो पाकिस्तान में बैठे उसके आका (हैंडलर) एवं सहयोगी हो सकते हैं।''
अदालत को बताया गया था, ''अब तक हुई जांच के दौरान, यह सामने आया है कि आरोपी कई आतंकियों के लगातार संपर्क में था।''
आईआईटी के प्रोफेसर रंजन बोस, मैरीलैंड विश्वविद्यालय में कंप्यूटर विज्ञान की छात्र अद्या वी जोशी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मदन ओबेरॉय के एक शोध पत्र के मुताबिक, '' जब दो संदिग्ध आपस में व्हाट्सऐप पर बात कर रहे हैं तो जीपीआरएस और सीडीआर की पड़ताल करने पर पता चलता है कि दोनों व्हाट्सऐप से जड़े हुए हैं। हालांकि, दूसरी तरफ देंखे तो यह सत्य नहीं है। दो लोग एक ही समय पर व्हाट्सऐप से जुड़े हुए हैं, इसका यह मतलब नहीं है कि दोनों एक-दूसरे से बातें कर रहे हैं।''
ओबेरॉय अभी इंटरपोल में कार्यकारी निदेशक हैं।
इसके मुताबिक, '' हालांकि, दो लोग एक ही समय पर कई बार व्हाट्सऐप पर हैं तो इस बात की संभावना बढ़ जाती है कि दोनों आपस में बातें कर रहे हैं। ऐसे में दो जीपीआरएस और सीडीआर का मिलान करने पर हमें पता चलता है कि दो संदिग्धों ने किस समय एक ही सेवा का एक-साथ इस्तेमाल किया।''
अधिकारियों का कहना है कि तकनीक की मदद से पुलिस पर्रा के फोन की पड़ताल कर रही है ताकि अदालत के समक्ष इस मामले में साक्ष्य पेश किए जा सकें।
इस शोध पत्र को वर्ष 2018 में इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर्स के चौथे अंतरराष्ट्रीय समारोह के दौरान जमा किया गया था।
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