देश की खबरें | जेल में बंद यूनिटेक के निदेशकों को वकीलों से रोज मुलाकात की मंजूरी नहीं : अदालत
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नयी दिल्ली, 10 जून दिल्ली उच्च न्यायालय ने जेल में बंद यूनिटेक के निदेशकों संजय और अजय चंद्रा की उनके वकीलों से रोज मुलाकात के अनुरोध करने वाली याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि उच्चतम न्यायालय का निर्देश है कि उन्हें कोई अतिरिक्त सुविधाएं मुहैया नहीं करायी जायें।

न्यायमूर्ति विभू बाखरू ने कहा कि दोनों को अन्य कैदियों की तरह ही हफ्ते में दो बार केवल 30 मिनट के लिए वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अपने वकीलों से मुलाकात करने की अनुमति मिलेगी।

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अदालत ने नौ जून के अपने आदेश में कहा, ‘‘चूंकि ऐसी सुविधाएं कैदियों को एक हफ्ते में दो बार दी जाती है तो अदालत को याचिकाकर्ताओं के इस अनुरोध को मानने की कोई वजह नहीं है कि उन्हें अपने खिलाफ मामलों में बचाव करने के लिए अपने वकीलों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए मुलाकात करने की अनुमति दी जाए।’’

इसमें कहा गया, ‘‘इन परिस्थितियों में जेल अधिकारियों को याचिकाकर्ताओं को हफ्ते में दो बार 30-30 मिनट के लिए वीडियो कांफ्रेंसिंग की सुविधा मुहैया कराने का निर्देश दिया जाता है।’’

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साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि वीडियो कांफ्रेंसिंग की सुविधा केवल वकीलों से बातचीत करने के लिए है न कि परिवार और दोस्तों से।

अदालत ने याचिका का निस्तारण करते हुए कहा, ‘‘अदालत का यह भी मानना है कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के मद्देनजर अतिरिक्त सुविधाएं देने का फैसला देना इस अदालत के लिए उपयुक्त नहीं होगा।’’

चंद्रा के वकील ने कहा कि वह आवश्यक स्पष्टीकरण हासिल करने के लिए उच्चतम न्यायालय जायेंगे।

दिल्ली पुलिस ने चंद्रा बंधुओं को गुरुग्राम में यूनिटेक की दो आवासीय परियोजनाओं के जरिए मकान खरीददारों को ठगने के आरोप में मार्च 2017 में गिरफ्तार किया था जिसके बाद उन्हें तिहाड़ जेल में रख गया।

उच्चतम न्यायालय ने उन्हें अपनी संपत्तियों को बेचने और मकान खरीददारों के पैसे लौटाने के लिए कहा है।

अपनी याचिका में उन्होंने दलील दी कि कोविड-19 वैश्विक महामारी के कारण वकीलों और परिवार के सदस्यों से मुलाकातें अनिश्चितकाल तक के लिए रोक दी गई हैं।

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