देश लॉकडाउन में ढील मिलने पर महामारी संकट के कारणों की जांच में जुट गया है।
इटली कोरोना वायरस की वजह से अमेरिका के बाद सबसे ज्यादा नागरिकों को खोने वाला देश है जहां इस वायरस की वजह से 26 हजार लोगों की मौत हुई है।
इटली में वायरस संक्रमण का पहला मामला 21 फरवरी को सामने आया था। जनसांख्यिकी और स्वास्थ्य देखभाल में कमियों के साथ ही राजनीतिक और कारोबारी हितों ने एक करोड़ की आबादी वाले लोम्बार्डी के लोगों को ऐसी आपदा की तरफ मोड़ दिया जो इससे पहले कभी देखी नहीं गई।
विषाणु विज्ञानी और महामारी विशेषज्ञों ने कहा कि क्या गलत हुआ, इसका अध्ययन करने में कई साल लगेंगे, कैसे एक बीमारी ने उस पूरी चिकित्सा व्यवस्था को ही धता बता दिया जिसे यूरोपीय देशों की श्रेष्ठ व्यवस्थाओं में से एक माना जाता था।
पड़ोसी इलाके वेनेटो में बीमारी का प्रकोप अपेक्षाकृत नियंत्रित था।
अधिकारी फिलहाल यह तय कर रहे हैं कि क्या कई नर्सिंग होम में हुई सैकड़ों लोगों की मौत के लिए कोई आपराधिक आरोप तय किया जा सकता है। इन मौतों में से कई को लोम्बार्डी के आधिकारिक मृतक आंकड़े 13,269 में गिना भी नहीं गया।
इसके विपरीत लोम्बार्डी के अग्रिम पंक्ति के चिकित्सकों और नर्सों की नायकों की तरह सराहना की जा रही है जिन्होंने असाधारण स्तर के तनाव, थकान, पृथक-वास और डर के बीच अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों का इलाज किया।
पहला मामला सामने आने के बाद भी इटली में डॉक्टर यह नहीं समझ सके कि कोविड-19 किस असामान्य तरीके से असर डाल सकता है। कई मरीजों को तो अचानक ही सांस लेने की क्षमता के कम होने का पता चला।
बुरी तरह प्रभावित क्रीमोना के सैन कैमिलो प्राइवेट क्लिनिक के डॉ. माउरीजियो मारविशी ने कहा, “हमारे पास वह नैदानिक जानकारी नहीं थी।”
इटली में पहला मामला सामने आने के कुछ दिनों बाद ही अस्पतालों के आईसीयू मरीजों से भर गए। ऐसे में कई प्राथमिक देखभाल करने वाले डॉक्टरों ने मरीजों को घर पर ही इलाज देना शुरू किया, यहां तक कि कई मरीजों को ऑक्सीजन भी दी गई। यह रणनीति और घातक साबित हुई, क्योंकि कई लोगों की घरों पर ही मौत हो गई या अस्पताल में भर्ती कराने के कुछ ही समय में उनकी मौत हो गई, क्योंकि उन्होंने अस्पताल ले जाए जाने का फैसला करने में ही काफी वक्त गंवा दिया।
इटली में आईसीयू क्षमता की भी बेहद कम साबित हुई। इटली में प्रति एक लाख लोगों पर 8.6 आईसीयू बिस्तर हैं जो कि ‘ऑर्गनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक को-ऑपरेशन एंड डेवपलमेंट’ के विकसित राष्ट्रों के 15.9 बिस्तरों के औसत से कहीं कम है।
करीब 20 हजार इतालवी चिकित्सा कर्मी संक्रमित हुए तो 150 डॉक्टरों की जान इसकी वजह से चली गई।
विशेषज्ञ एक बड़ी वजह शहरों के बीच आवाजाही रोकने में हुई देरी को भी मान रहे हैं।
एपी
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