नयी दिल्ली, 16 सितंबर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने शनिवार को कहा कि भारत चांद पर पहुंच गया है, लेकिन यह देखकर दुख होता है कि कुछ लोगों को देश की प्रगति पसंद नहीं है।
संगीत नाटक अकादमी अमृत पुरस्कार समारोह में, धनखड़ ने उन कलाकारों के काम को सम्मान नहीं देने को लेकर पूर्ववर्ती सरकारों की आलोचना की, जिन्हें पद्म पुरस्कारों से काफी पहले सम्मानित किया जाना चाहिए था।
उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के ‘चंद्रयान-3’ मिशन की सफलता की प्रशंसा करते हुए कहा, ‘‘चंद्रमा पर हमने जो हासिल किया, उसमें कुछ ऐसे पहलू थे तो दुनिया में पहली बार हैं जिसमें चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव पर उतरना भी शामिल है।’’
उपराष्ट्रपति ने कहा, ‘‘एक वक्त था जब हमारे पड़ोसी अपनी धरती से अंतरिक्ष में उपग्रह भेज रहे थे और हम दूसरे देशों से भेज रहे थे। आज यूरोपीय देश, सिंगापुर और अन्य देश अपने उपग्रह भेजने के लिए इसरो की सेवाएं ले रहे हैं। यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है।’’
उन्होंने कहा कि विश्व बैंक प्रमुख ने डिजिटल विकास के लिए भारत की प्रशंसा की और कहा कि ‘‘उसने पिछले छह वर्ष में ऐसी उपलब्धियां हासिल की है जो पिछले 50 वर्ष में नहीं किया जा सका।’’
धनखड़ ने कहा, ‘‘मुझे दुख होता है कि कुछ ऐसे लोग हैं, जो संख्या में बहुत कम हैं, उन्हें भारत की प्रगति अच्छी नहीं लगती?’’
संगीत नाटक अकादमी ने 75 वर्ष से अधिक आयु के कुल 84 कलाकारों को सम्मान देने के लिए अमृत पुरस्कारों की शुरुआत की है, जिन्हें अभी तक उनके काम के लिए कभी कोई पुरस्कार नहीं दिया गया।
धनखड़ ने कहा, ‘‘चयन को देखिए, सभी की उम्र 75 वर्ष से अधिक हैं और अभी तक किसी ने उनके योगदान के लिए सम्मानित नहीं किया। ऐसा क्यों हुआ? कलाकारों को पद्म पुरस्कार देने की हमारी संस्कृति थी लेकिन वे किसे और कैसे दिए गए?’’
उन्होंने कहा, ‘‘पिछले 10 वर्ष में जिन लोगों को पद्म पुरस्कार मिले हैं, उन्होंने कभी इसके मिलने की उम्मीद नहीं की थी। इस देश के इतिहास में कभी पद्म पुरस्कार दिए जाने के बाद उन्हें इतनी व्यापक स्वीकृति नहीं मिली है।’’
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