नयी दिल्ली, आठ सितंबर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने शुक्रवार को उम्मीद जताई कि भारत की जी20 की अध्यक्षता ऐसे क्रांतिकारी बदलाव लाने में कारगर होगी जिनका दुनिया बेसब्री से इंतजार कर रही है।
उन्होंने बंटे हुए विश्व में बढ़ते विभाजन और कम होते विश्वास के खिलाफ भी आगाह किया।
जी20 सम्मेलन से पहले यहां संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जी20 की थीम के रूप में भारत द्वारा अपनाया गया ‘एक पृथ्वी, एक परिवार और एक भविष्य’ का सूत्रवाक्य महाउपनिषद से प्रेरित है और उसमें आज की दुनिया की प्रतिध्वनि है।
उन्होंने कहा, ‘‘यदि हम वास्तव में एक वैश्विक परिवार हैं, तो आज हमें ऐसा दिखना चाहिए, न कि हम निष्क्रिय दिखें।’’
गुतारेस ने कहा, ‘‘मुझे उम्मीद है कि भारत की जी20 की अध्यक्षता उस तरह के क्रांतिकारी बदलाव को आगे बढ़ाने में मदद करेगी जिसकी हमारी दुनिया को सख्त जरूरत है, जो ‘ग्लोबल साउथ’ की ओर से कार्य करने की भारत की बार-बार की प्रतिबद्धताओं और विकासात्मक एजेंडे को आगे बढ़ाने के उसके दृढ़ संकल्प के अनुरूप हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘विभाजन बढ़ रहे हैं, तनाव बढ़ रहे हैं और विश्वास कम हो रहा है। ये सब मिलकर अंतत: टकराव को बढ़ावा देते हैं।’’
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कहा कि दुनिया परिवर्तन के मुश्किल दौर में है और इसका भविष्य बहुध्रुवीय है, लेकिन हमारे बहुपक्षीय संस्थानों में गुजरे जमाने की झलक मिलती है।
उन्होंने कहा, ‘‘वैश्विक वित्तीय ढांचा पुराना, निष्क्रिय और अन्यायपूर्ण है। इसमें गहन ढांचागत सुधारों की जरूरत है और यही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के बारे में भी कहा जा सकता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि हमें आज के विश्व की वास्तविकताओं को परिलक्षित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की जरूरत है।’’
गुतारेस ने कहा, ‘‘हमें 21वीं सदी को प्रदर्शित करना होगा, इसलिए मैं ऐसे साहसिक कदम उठाने की वकालत करता आ रहा हूं जिनमें वैश्विक संस्थाओं को वास्तविक रूप में सार्वभौमिक बनाया जाए, वे आज की वास्तविकताओं का प्रतिनिधित्व करें और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की जरूरतों पर अधिक प्रतिक्रियाशील हों।’’
उन्होंने आगाह किया कि युद्ध और संघर्ष बढ़ते जा रहे हैं और नई प्रौद्योगिकियां नई चुनौतियों पैदा कर रही हैं।
गुतारेस ने कहा, ‘‘गरीबी, भुखमरी और असमानता बढ़ रही है, लेकिन वैश्विक एकजुटता की कमी है। हमें साझा भलाई के लिए मिलकर काम करना चाहिए।’’
उन्होंने जी20 के सदस्य देशों से आग्रह किया कि वे ऐसी चुनौतियों से निपटने के लिए मिलकर काम करें, क्योंकि वे वैश्विक अर्थव्यवस्था का नियंत्रण कर रहे हैं।
गुतारेस ने कहा कि जलवायु संकट तेजी से गहरा रहा है, लेकिन सामूहिक प्रतिक्रिया में महत्वाकांक्षा, प्रामाणिकता और तत्परता की कमी है।
उन्होंने कहा कि जी20 के नेताओं को जलवायु पर और सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने पर नेतृत्व का प्रदर्शन करना होगा।
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कहा कि जी20 के देश 80 प्रतिशत उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं और उन्हें इसे कम करने की दिशा में अगुवाई करनी होगी।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत जी20 सम्मेलन की तैयारी के दौरान इस बात का हरसंभव प्रयास कर रहा है कि ‘ग्लोबल साउथ’ के हितों का पूरी तरह से प्रतिनिधित्व हो।
‘ग्लोबल साउथ’ शब्द का इस्तेमाल आम तौर पर आर्थिक रूप से कम विकसित देशों को संदर्भित करने के लिए किया जाता है।
गुतारेस ने कहा कि इस बात की बहुत उम्मीद नहीं है कि हमें रूस-यूक्रेन संघर्ष पर निकट भविष्य में कोई शांति समाधान मिल पाएगा।
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