देहरादून, 22 दिसंबर उत्तराखंड विधानसभा में मंगलवार को एक जिलाधिकारी द्वारा विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथसिंह चौहान को दो टूक जवाब दिए जाने का मामला गूंजा जिसे गंभीरता से लेते हुए अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने सरकार से संबंधित अधिकारी से खेद प्रकट करवाने को कहा।
अध्यक्ष अग्रवाल ने यह भी कहा कि अगर सरकार के इन निर्देशों का पालन नहीं हुआ तो विधानसभा पीठ इसका संज्ञान लेगी।
राज्य विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठा। चौहान की ओर से रखे गए विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव के समर्थन में आये कांग्रेस सदस्यों ने कहा कि चौहान ने अपने क्षेत्र में तीन कोविड-19 मरीजों की मौत के बाद उन्होंने अल्मोडा के जिलाधिकारी को मुख्य चिकित्साधिकारी को मौके पर भेजने को कहा था जिस पर जिलाधिकारी ने उन्हें दो टूक जवाब देते हुए कहा कि वह अधिकारी को नहीं भेजेंगे।
नेता प्रतिपक्ष इंदिरा ह्रदयेश ने प्रदेश में नौकरशाही के निरंकुश होने का आरोप लगाते हुए कहा कि लगभग हर विधायक उसके हाथों अपमान झेल रहा है। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारी को बुलाकर ऐसा संदेश दिया जाना चाहिए कि उसका अपराध क्षमायोग्य नहीं है। अन्य कांग्रेस सदस्यों प्रीतम सिंह, काजी निजामुद्दीन आदि ने भी ह्रदयेश का समर्थन करके अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
इस पर संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक ने कहा कि उपाध्यक्ष चौहान ने उन्हें इस मामले के बारे में सोमवार दोपहर को बताया था और उसी समय उन्होंने जिलाधिकारी को फोन करके उनसे सत्र की समाप्ति के बाद उपाध्यक्ष चौहान से मिलकर खेद प्रकट करने के निर्देश दे दिए थे।
अध्यक्ष अग्रवाल ने कहा कि यह गंभीर विषय है और सरकार को इसे गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारी से निर्देशों का पालन करवाया जाए अन्यथा पीठ इसका संज्ञान लेगी।
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