नयी दिल्ली, चार मार्च रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि भारत के सुरक्षा तंत्र को साइबर और ‘हाइब्रिड’ युद्ध के साथ-साथ ‘‘अंतरिक्ष आधारित जासूसी’’ जैसे उभरते खतरों से निपटने में सक्षम बने रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आंतरिक सुरक्षा का अभिप्राय केवल आतंकवाद, अलगाववादी आंदोलन और वामपंथी उग्रवाद जैसे पारंपरिक खतरों से निपटना नहीं है, बल्कि इसका मतलब उन गैर पारंपरिक खतरों से निपटने की तैयारी करना भी है जो देश के आर्थिक और सामरिक हितों को अस्थिर कर सकते हैं।
सिंह ने कहा, ‘‘आज के शत्रु हमेशा पारंपरिक हथियारों के साथ नहीं आते हैं; साइबर हमले, गलत सूचना अभियान और अंतरिक्ष आधारित जासूसी नए युग के खतरों के रूप में उभर रहे हैं जिनके लिए उन्नत समाधान की आवश्यकता है।’’
रक्षा मंत्री सिंह रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और गृह मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से ‘‘आंतरिक सुरक्षा और आपदा राहत कार्यों के लिए उन्नत प्रौद्योगिकी’’ पर आयोजित एक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
सिंह ने अपने संबोधन में वैश्विक सुरक्षा में बढ़ती जटिलताओं तथा आंतरिक और बाह्य खतरों के बीच बढ़ते हुए अंतर संबंध को रेखांकित किया।
उन्होंने कहा, ‘‘आधुनिक विश्व में सुरक्षा चुनौतियां तेजी से बढ़ रही हैं तथा आंतरिक और बाह्य सुरक्षा के बीच अंतरसंबंध बढ़ रहा है।’’
सिंह ने कहा, ‘‘यह जरूरी है कि हमारी संस्थाएं बंदिशों को तोड़कर एक मजबूत, सुरक्षित और आत्मनिर्भर भारत सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करें।’’
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को समग्र रूप से देखा जाना चाहिए, विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के प्रयासों को एकीकृत करना चाहिए तथा नवीनतम तकनीकी प्रगति का लाभ उठाना चाहिए।
सिंह ने कहा, ‘‘डीआरडीओ ने भारत की रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है और आंतरिक सुरक्षा में इसका योगदान भी उतना ही सराहनीय है।’’उन्होंने कहा, ‘‘छोटे हथियारों और बुलेटप्रूफ जैकेट से लेकर निगरानी और संचार प्रणालियों तक, डीआरडीओ के नवाचार हमारे सुरक्षा बलों को सशक्त बना रहे हैं।’’
सिंह ने डीआरडीओ और गृह मंत्रालय से आह्वान किया कि वे मिलकर ऐसे उत्पादों की एक साझा सूची बनाएं जिन्हें समयबद्ध तरीके से संयुक्त रूप से विकसित और तैनात किया जा सके। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे सुरक्षा बलों को आगे रहने के लिए सर्वोत्तम उपकरणों और प्रौद्योगिकियों की आवश्यकता है।’’
रक्षामंत्री ने कहा, ‘‘डीआरडीओ का आधुनिकीकरण पर ध्यान केंद्रित करना उत्साहजनक है, जिसमें छोटे हथियार, निगरानी उपकरण और ड्रोन प्रणाली जैसे उत्पाद आंतरिक सुरक्षा एजेंसियों में तैनाती के लिए या तो शामिल किए जा चुके हैं या उनका आकलन किया जा रहा है।’’
सिंह ने गृह मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए बताया कि किस प्रकार सुरक्षा एजेंसियों और वैज्ञानिक संस्थानों के बीच सहयोग से महत्वपूर्ण तकनीकी प्रगति हुई।
उन्होंने डीआरडीओ द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों जैसे कॉर्नर शॉट हथियार प्रणाली, इंसास राइफल, आईईडी (संवर्धित विस्फोटक उपकरण), जैमर वाहन और दंगा नियंत्रण वाहनों का उदाहरण दिया, जिन्हें केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के संचालन में प्रभावी रूप से शामिल किया गया था।
सिंह ने न केवल सुरक्षा के लिए बल्कि आपदा प्रबंधन और मानवीय राहत के लिए भी प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने के महत्व पर बात की।
रक्षामंत्री ने न केवल सुरक्षा के लिए बल्कि आपदा प्रबंधन और मानवीय राहत के लिए भी प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने के महत्व को रेखांकित किया।
उन्होंने कहा, ‘‘प्रौद्योगिकी की भूमिका सिर्फ रक्षा में ही नहीं है, बल्कि शांति और सामाजिक कल्याण सुनिश्चित करने में भी है। बुलेटप्रूफ जैकेट, ड्रोन, निगरानी उपकरण और ड्रोन रोधी प्रौद्योगिकियों जैसी उन्नत प्रणालियों का उपयोग सिर्फ सुरक्षा अभियानों के लिए ही नहीं, बल्कि आपदा प्रबंधन और मानवीय राहत के लिए भी किया जाना चाहिए।’’
सिंह ने कहा कि चक्रवात, हिमस्खलन, भूकंप और बादल फटने जैसी प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती आवृत्ति ने उन्नत बचाव उपकरणों की आवश्यकता को रेखांकित किया है।
उन्होंने बताया कि थर्मल इमेजिंग कैमरे, ड्रोन आधारित पहचान प्रणाली और पीड़ितों का पता लगाने वाले उपकरणों जैसी प्रौद्योगिकियों के उपयोग से हताहतों की संख्या और क्षति में काफी कमी लाई जा सकती है।
उत्तराखंड के माणा में हाल ही में हिमखंड टूटने की घटना का उल्लेख करते हुए रक्षा मंत्री ने जीवन बचाने और आपदा के प्रभाव को कम करने में उन्नत बचाव उपकरणों के उपयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि उन्नत प्रौद्योगिकी के उपयोग से आपदाओं के प्रभाव को न्यूनतम किया जा सकता है।
सिंह ने कहा, ‘‘आज भारत एक समृद्ध राष्ट्र है और आपदा प्रबंधन हमारी तैयारियों का अभिन्न अंग बनना चाहिए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘सुरक्षा एजेंसियों और प्रौद्योगिकी विकास करने वालों का नेतृत्व करना ही पर्याप्त नहीं है; हमें आम जनता को भी शिक्षित करना चाहिए। हर नागरिक को पता होना चाहिए कि संकट के समय में कैसे प्रतिक्रिया करनी है।’’
सिंह ने देश के विभिन्न क्षेत्रों के समक्ष उपस्थित विभिन्न सुरक्षा खतरों के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा, ‘‘भारत में सुरक्षा संबंधी खतरे एक समान नहीं हैं। पूर्वोत्तर में उग्रवाद के कारण उत्पन्न समस्याएं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों या सीमावर्ती क्षेत्रों से भिन्न हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इसी प्रकार, शहरी सुरक्षा चिंताएं ग्रामीण क्षेत्रों से भिन्न हैं। हमें समर्पित सम्मेलन आयोजित करने की आवश्यकता है जो क्षेत्र-विशेष चुनौतियों और समाधानों पर ध्यान केंद्रित करें।’’
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