नयी दिल्ली, 11 दिसंबर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने सोमवार को कहा कि भारत की जैव-अर्थव्यवस्था पिछले आठ वर्षों में आठ गुना बढ़कर 10 अरब अमेरिकी डॉलर से 80 अरब अमेरिकी डॉलर हो गई है।
उन्होंने रेखांकित किया कि आने वाले समय में जैव प्रौद्योगिकी चिकित्सा के लिए सबसे बड़ा आधार बनेगी।
अहमदाबाद के विज्ञान भवन में ‘बायोटेक्नोलॉजी : द पाथ ऑफ इनोवेशन ऐंड वेलनेस फॉर विकसित भारत’ नाम से आयोजित कार्यक्रम को ऑनलाइन माध्यम से संबोधित करते हुए मांडविया ने कहा कि भारतीय जैव प्रौद्योगकी उद्योग को 2025 तक 150 अरब डॉलर और 2030 तक 300 अरब डॉलर तक करने का लक्ष्य है।
मांडविया ने कहा कि भारत वर्तमान में वैश्विक जैव प्रौद्योगिकी उद्योग में लगभग तीन प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दुनिया में जैव प्रौद्योगिकी के लिए शीर्ष 12 गंतव्यों में से एक है।
यह कार्यक्रम 10वें वाइब्रेंट गुजरात वैश्विक शिखर सम्मेलन के क्रम में आयोजित किया गया जिसमें गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल ने भी हिस्सा लिया। शिखर सम्मेलन जनवरी में गांधीनगर में ‘गेटवे टू द फ्यूचर’ थीम के साथ आयोजित किया जाएगा।
मांडविया ने कहा, ‘‘यह उद्योग (जैव प्रौद्योगिकी) कृषि, पर्यावरण, औद्योगिक उत्पादन और कई अन्य क्षेत्रों में जटिल समस्याओं का समाधान खोजने का माध्यम बनेगा। इसके मद्देनजर भविष्य में अर्थव्यवस्था जैव प्रौद्योगिकी आधारित हो जाएगी।’’
देश और अर्थव्यवस्था में जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र के महत्वपूर्ण योगदान को स्वीकार करते हुए, मुख्यमंत्री पटेल ने कहा, ‘‘ ‘गेटवे टू द फ्यूचर’ की थीम के साथ तालमेल बिठाते हुए, हम भविष्य के क्षेत्रों पर अतिरिक्त ध्यान केंद्रित करेंगे जिनमें जैव प्रौद्योगिकी सबसे महत्वपूर्ण है।’’
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