देश की खबरें | कतर में हिरासत में लिये गए भारतीयों के सम्पर्क में भारतीय दूतावास, राजनयिक पहुंच मांगी गई: विदेश मंत्रालय

नयी दिल्ली, छह अप्रैल विदेश मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि कतर में हिरासत में लिए गए भारतीय नौसेना के आठ पूर्व कर्मियों का मामला वहां की अदालत को भेजा गया है और 29 मार्च को पहली सुनवाई हुई हालांकि अभी तक आरोप सामने नहीं आए हैं।

मंत्रालय ने कहा कि दोहा में भारतीय दूतावास के अधिकारी हिरासत में लिये गए भारतीयों के परिवार के सम्पर्क में हैं और कतर प्रशासन से एक और दौर की राजनयिक पहुंच मांगी गई है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने साप्ताहिक प्रेस वार्ता में कहा, ‘‘हम समझते हैं कि लोक अभियोजन ने इस मामले को अदालत को भेजा है और पहली सुनवाई 29 मार्च को हुई जिसमें बचाव पक्ष के वकील और भारतीय अधिकारी शामिल हुए।’’

उन्होंने कहा कि दोहा में भारतीय दूतावास के अधिकारी हिरासत में लिये गए भारतीयों के परिवार के साथ सम्पर्क बनाये हुए हैं और कानूनी मदद प्रदान कर रहे हैं। बागची ने कहा, ‘‘हमने एक और दौर की राजनयिक पहुंच प्रदान करने का आग्रह किया है।’’

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि वह नहीं समझते हैं कि अभी आरोप सामने आए हैं।

प्रवक्ता ने कहा कि भारत इस मामले को उच्च प्राथमिकता देता है और इस विषय को वहां के प्रशासन के समक्ष उठा रहा है।

ज्ञात हो कि कतर में हिरासत में लिये गये लोग दाहरा ग्लोबल टेक्नॉलोजी एंड कंसलटेंसी के लिए काम कर रहे थे। यह एक निजी कंपनी है।

इस मामले में कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश की टिप्पणियों के बारे में पूछे जाने पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि आमतौर पर वे ऐसे सवालों पर प्रतिक्रिया नहीं देते हैं लेकिन यह कहना चाहते हैं कि अगर भारत के किसी दूसरे देश के साथ अच्छे संबंध है, इसका मतलब यह नहीं है कि उसे कानून से छूट मिल जाती है।

उन्होंने कहा कि किसी देश के साथ अच्छे संबंध कानूनी प्रक्रिया में आड़े नहीं आ सकते हैं।

कांग्रेस ने कतर में गिरफ्तार आठ पूर्व नौसैनिकों के अब तक रिहा नहीं होने पर चिंता जताते हुए बृहस्पतिवार को सवाल किया कि केंद्र सरकार इन लोगों की रिहाई सुनिश्चित करने में असमर्थ क्यों है।

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने एक बयान में कहा, ‘‘30 अगस्त 2022 को कतर के अधिकारियों ने भारतीय नौसेना के आठ पूर्व कर्मियों को गिरफ़्तार किया था, जो कतर नौसेना को प्रशिक्षण देने के कार्य में शामिल थे। आठों को कथित तौर पर एकांत कारावास में रखा गया है।’’

रमेश ने सवाल किया, ‘‘भारत सरकार अभी भी इस मामले के तथ्यों का पता लगाने या नौसेना के पूर्व कर्मियों और उनके परिवारों को न्याय के लिए आश्वस्त करने में असमर्थ क्यों है?

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)