भारत ने रूस से तेल खरीदने के अपने रुख का कभी बचाव नहीं किया: मंत्री एस जयशंकर
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि रूस से तेल खरीदने के भारत के फैसले की अमेरिका और दुनिया के अन्य देश भले ही सराहना न करें, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया है, क्योंकि नयी दिल्ली ने अपने रुख का कभी बचाव नहीं किया, बल्कि उन्हें यह एहसास कराया कि तेल एवं गैस की ‘‘अनुचित रूप से अधिक’’ कीमतों के बीच सरकार का अपने लोगों के प्रति क्या दायित्व है.
बैंकॉक, 17 अगस्त : विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि रूस से तेल खरीदने के भारत के फैसले की अमेरिका और दुनिया के अन्य देश भले ही सराहना न करें, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया है, क्योंकि नयी दिल्ली ने अपने रुख का कभी बचाव नहीं किया, बल्कि उन्हें यह एहसास कराया कि तेल एवं गैस की ‘‘अनुचित रूप से अधिक’’ कीमतों के बीच सरकार का अपने लोगों के प्रति क्या दायित्व है. जयशंकर भारत-थाईलैंड संयुक्त आयोग की नौवीं बैठक में भाग लेने के लिए मंगलवार को यहां पहुंचे और उन्होंने एक समारोह में भारतीय समुदाय के सदस्यों से मुलाकात की. जयशंकर ने भारतीय समुदाय के साथ मुलाकात के दौरान यूक्रेन एवं रूस के मध्य जारी युद्ध के बीच, रूस से कम दाम पर तेल खरीदने के भारत के फैसले का बचाव किया और कहा कि भारत के कई आपूर्तिकर्ताओं ने अब यूरोप को आपूर्ति करना शुरू कर दिया है, जो रूस से कम तेल खरीद रहा है.
उन्होंने कहा कि तेल की कीमत ‘‘अनुचित रूप से अधिक’’ हैं और यही हाल गैस की कीमत का है. उन्होंने कहा कि एशिया के कई पारंपरिक आपूर्तिकर्ता अब यूरोप को आपूर्ति कर रहे हैं, क्योंकि यूरोप रूस से कम तेल खरीद रहा है. जयशंकर ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा, ‘‘आज स्थिति ऐसी है कि हर देश अपने नागरिकों के लिए सर्वश्रेष्ठ सौदा करने की कोशिश करेगा, ताकि वह इन उच्च कीमतों का असर झेल सके और हम यही कर रहे हैं.’’ उन्होंने कहा कि भारत ‘‘रक्षात्मक तरीके’’ से ऐसा नहीं कर रहा है. जयशंकर ने कहा, ‘‘हम अपने हितों को लेकर बहुत खुले एवं ईमानदार रहे हैं. मेरे देश में प्रति व्यक्ति आय दो हजार डॉलर है. वे लोग ऊर्जा की अत्यधिक कीमत को वहन नहीं कर सकते.’’ उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करना उनका ‘‘दायित्व’’ एवं ‘‘नैतिक कर्तव्य’’ है कि भारत को सर्वश्रेष्ठ सौदा मिले. रूस से तेल खरीदने के कारण अमेरिका के साथ भारत के संबंधों पर पड़ने वाले असर के बारे में पूछे जाने पर जयशंकर ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि न केवल अमेरिका बल्कि अमेरिका समेत सभी जानते हैं कि हमारी क्या स्थिति है और वे इस बारे में अब आगे बढ़ चुके हैं.’’
उन्होंने कहा, ‘‘जब आप खुलकर और ईमानदारी से अपनी बात रखते हैं, तो लोग उसे स्वीकार कर लेते हैं.’’ जयशंकर ने कहा, ‘‘वे हमेशा संभवत: उसकी सराहना नहीं करेंगे, लेकिन जब आप बात करते हैं और चालाकी करने की कोशिश नहीं करते, जब आप बिल्कुल सीधे तरीके से अपने हित सामने रखते हैं, तो मुझे लगता है कि दुनिया वास्तविकता को काफी हद तक स्वीकार कर लेती हैं.’’ यूक्रेन पर रूस ने 24 फरवरी को हमला कर दिया था, जिसके बाद अमेरिका और यूरोपीय देशों ने उस पर कड़े प्रतिबंध लगाए. भारत ने पश्चिमी देशों की आलोचना के बावजूद रूस से यूक्रेन युद्ध के बाद तेल आयात बढ़ाया है और उसके साथ व्यापार करना जारी रखा है. यह भी पढ़ें : नाकामी बर्दाश्त नहीं कर पाते थे शास्त्री: बल्लेबाज दिनेश कार्तिक
इससे पहले, जयशंकर ने भारत के समक्ष मौजूद विभिन्न चुनौतियों को रेखांकित किया. उन्होंने कहा, ‘‘हमने लंबे समय तक सीमा पार आतंकवाद के असर की चुनौती झेली है. पिछले दो साल में हमारी उत्तरी सीमा पर भी चुनौतीपूर्ण स्थिति है.’’ उन्होंने कहा कि उत्तरी सीमा पर एक ऐसी स्थिति पैदा हो गई है जो भारत की उसके उत्तरी पड़ोसी चीन के साथ आपसी समझ के खिलाफ है.जयशंकर ने कहा कि इसके अलावा भी वैश्विक महामारी, जलवायु परिवर्तन और समुद्री सुरक्षा जैसे कई मामले हैं, जो भारत को प्रभावित करते हैं. उन्होंने भारत और थाईलैंड के संबंधों के बारे में कहा, ‘‘दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्रों के संगठन (आसियान) के सदस्य देशों में थाईलैंड विशेष रूप से हमारे लिए महत्वपूर्ण रहा है. यह आज एक बहुत बड़ा साझीदार है.... मुझे लगता है कि हमारा आज 15 अरब डॉलर से अधिक का व्यापार है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं थाईलैंड के साथ हमारे संबंधों को आगे ले जाने आया हूं.’’
(The above story first appeared on LatestLY on Aug 17, 2022 01:25 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

