नयी दिल्ली, आठ मई उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत ने हमेशा वैश्विक शांति, बंधुत्व व कल्याण में विश्वास किया है। साथ ही उनका कहना था कि बहुध्रुवीय विश्व में साझेदार बदलते रहते हैं।
उन्होंने यहां अपने सरकारी आवास पर ‘इंडिया फाउंडेशन’ के एक कार्यक्रम में कहा, “गठबंधन के मामले में भी यही बात देखी जा सकती है।”
कौटिल्य का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि पड़ोसी राष्ट्र शत्रु है और शत्रु का शत्रु मित्र होता है।
उन्होंने कहा, “भारत से बेहतर कौन सा देश इस बात को जानता है। हम हमेशा वैश्विक शांति, वैश्विक बंधुत्व, वैश्विक कल्याण में विश्वास करते हैं। और इसीलिए मैंने कहा कि जी-20 के लिए हमारा आदर्श वाक्य (वसुधैव कुटुम्बकम) सौ फीसदी प्रतिबिंबित होता है।”
उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कौटिल्य के दर्शन को अपने आचरण में उतारा है।
धनखड़ ने कहा, "कौटिल्य की विचार प्रक्रिया शासन-प्रणाली के हर पहलू - शासन कला, सुरक्षा, राजा की भूमिका - में अब निर्वाचित लोगों के लिए एक तरह से विश्वकोश है।"
सत्ता और शासन के मूलभूत सिद्धांतों पर विचार व्यक्त करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, "सत्ता सीमाओं से परिभाषित होती है। लोकतंत्र तभी विकसित होता है जब हम सत्ता की सीमाओं के प्रति हमेशा सचेत रहते हैं। अगर आप कौटिल्य के दर्शन पर गहराई से गौर करेंगे, तो पाएंगे कि यह सब केवल एक सार, शासन के अमृत - लोगों के कल्याण पर केंद्रित है।"
धनखड़ ने कहा कि लोकतंत्र तब सबसे बेहतर तरीके से विकसित होता है जब अभिव्यक्ति और संवाद एक दूसरे के पूरक होते हैं।
उन्होंने कहा, "इसके जरिए ही लोकतंत्र किसी भी अन्य शासन प्रणाली से अलग होता है। भारत में, लोकतंत्र हमारे संविधान के लागू होने या विदेशी शासन से स्वतंत्र होने के साथ शुरू नहीं हुआ। हम हजारों वर्षों से लोकतांत्रिक राष्ट्र रहे हैं ... इस अभिव्यक्ति और संवाद को वैदिक संस्कृति में अनंत वाद के रूप में जाना जाता है।"
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY