मुंबई, 21 जुलाई महाराष्ट्र में विपक्ष ने शुक्रवार को कहा कि मुंबई के प्रभारी मंत्रियों ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) मुख्यालय में कार्यालय स्थापित करके एक गलत मिसाल पेश की है और यह नगर निकायों के अधिकारों के अतिक्रमण का कृत्य है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता जयंत पाटिल ने महाराष्ट्र विधानसभा में यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मुंबई उपनगरों के प्रभारी मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने बीएमसी के एक केबिन में अपना कार्यालय बनाया है।
पाटिल ने कहा, ‘‘मैं इस शहर का प्रभारी मंत्री था और नगर निकाय में कार्यालय खोलना उसके अधिकारों का अतिक्रमण है। बीएमसी में कोई निर्वाचित प्रतिनिधि नहीं है और सरकार को उसकी स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय स्वशासित निकायों से अधिक दूरी बनानी होगी।’’
राकांपा के वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘‘बीएमसी आयुक्त को मंत्री के कार्यालय में सम्मन किया जा सकता है लेकिन कार्यालय बनाना गलत मिसाल है।’’
राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता आदित्य ठाकरे ने कहा कि बाजार समिति और शिक्षा समिति के अध्यक्ष के केबिन दो प्रभारी मंत्रियों को दे दिए गए हैं।
ठाकरे ने लोढा पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘इसके पीछे क्या वजह थी? क्या वे वहां टावर बनाना चाहते हैं?’’
दरअसल, लोढा का परिवार रियलिटी के कारोबार में शामिल है।
ठाकरे ने आरोप लगाया, ‘‘यह गलत उदाहरण है क्योंकि मंत्रियों और स्थानीय स्व-शासन के कर्तव्य अलग-अलग हैं। बीएमसी में अब कोई महापौर या जन प्रतिनिधि नहीं है। यह घोटाला करने के लिए किया गया है।’’
शिवसेना (यूबीटी) नेता ने कहा कि अगर प्रभारी मंत्रियों को बीएमसी में केबिन दिए जाते हैं तो राज्य में सभी महापौरों को मंत्रालय (राज्य सचिवालय) में कार्यालय दिए जाने चाहिए और मुंबई के विधायकों को नगर निकाय मुख्यालय में कार्यालय दिए जाने चाहिए।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY