नयी दिल्ली, 19 अप्रैल भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) छात्रों द्वारा क्रेडिट अर्जित करने, संचित करने और हस्तांतरित करने की सुविधा के लिए ‘राष्ट्रीय क्रेडिट रूपरेखा’ (एनसीआरएफ) अपनाएंगे। आईआईटी परिषद ने अपनी 55वीं बैठक में यह फैसला किया।
पिछले सप्ताह अधिसूचित राष्ट्रीय क्रेडिट रूपरेखा एक व्यापक क्रेडिट रूपरेखा है जिसमें प्रारंभिक, स्कूली, उच्चस्तरीय और वाणिज्यिक शिक्षा तथा प्रशिक्षण शामिल हैं। यह विभिन्न आयामों - शिक्षाविदों, व्यावसायिक कौशल और अनुभव आधारित प्रशिक्षण के साथ-साथ प्रासंगिक अनुभव, प्रवीणता और पेशेवर स्तरों में प्रशिक्षण के क्रेडिट को भी एकीकृत करता है।
आईआईटी परिषद की मंगलवार को भुवनेश्वर में हुई बैठक में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के अध्यक्ष एम जगदीश कुमार ने एनसीआरएफ पर प्रस्तुतिकरण दिया।
आईआईटी परिषद ने आम-सहमति से राष्ट्रीय क्रेडिट रूपरेखा को अपनाने और सभी आईआईटी में इसे लागू करने का फैसला किया।
कुमार ने बैठक में कहा, ‘‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में शिक्षा को और अधिक समग्र तथा प्रभावी बनाने की सोच है और इसमें सामान्य (अकादमिक) शिक्षा और व्यावसायिक शिक्षा के एकीकरण पर जोर दिया गया है। इस सोच को साकार करने के लिए एक राष्ट्रीय क्रेडिट संचय और हस्तांतरण प्रणाली जरूरी है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘सरकार ने यूजीसी, एआईसीटीई, एनसीवीईटी, एनआईओएस, सीबीएसई, एनसीईआरटी, डीजीटी, शिक्षा मंत्रालय और कौशल विकास मंत्रालय के सदस्यों के साथ उच्चस्तरीय समिति गठित की।’’
स्कूली शिक्षा को पहली बार क्रेडिट रूपरेखा के तहत लाने के साथ राष्ट्रीय क्रेडिट रूपरेखा ने प्रशिक्षण प्रणाली को आठ स्तरों में बांट दिया है जिसमें प्रशिक्षण के घंटों के आधार पर क्रेडिट आवंटित किये जाते हैं।
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