श्रीनगर, 27 जुलाई मीरवाइज़ उमर फारूक के नेतृत्व वाले हुर्रियत गुट ने बुधवार को जेल में बंद कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर गंभीर चिंता व्यक्त की और आरोप लगाया कि जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक कैदियों से ''बदला लेने के लिए'' ऐसा किया जा रहा है।
दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद मलिक ने 22 जुलाई को उस समय अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी जब केंद्र ने रुबैया सईद अपहरण मामले की सुनवाई कर रही जम्मू की एक अदालत में शारीरिक रूप से पेश होने की उसकी याचिका का जवाब नहीं दिया, जिसमें वह एक दोषी है।
जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के नेता को रक्तचाप में उतार-चढ़ाव के बाद बुधवार को राजधानी के डॉ राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
हुर्रियत कांफ्रेंस ने एक बयान में कहा, ''जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक बंदियों से बदला लिया जा रहा है और न्याय के सभी मानदंडों की अनदेखी की जा रही है।''
बयान के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के लोगों के नेताओं को या तो नज़रबंद कर दिया जाता है या जेलों में कैद कर दिया जाता है। ये सब न केवल बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि अवैध भी है।''
हुर्रियत ने कहा कि राजनीतिक विचारधाराओं के आधार पर दमन और हिरासत, प्रतिबंध, सेंसरशिप, प्रतिबंधों के माध्यम से शांति स्थापित करने के दावों से न तो तथ्य बदल सकते हैं और न ही भावनाएं।
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