नयी दिल्ली, 26 अप्रैल कर्ज में डूबी कंपनी रिलायंस कैपिटल लिमिटेड (आरसीएल) की बिक्री के लिए बुधवार को आयोजित नीलामी के दूसरे चरण में हिंदुजा समूह की कंपनी आईआईएचएल 9,650 करोड़ रुपये की बोली के साथ सबसे बड़ी बोलीकर्ता बनकर उभरी।
सूत्रों ने बुधवार को बताया कि ऑनलाइन नीलामी के दूसरे दौर में सबसे ऊंची बोली इंडसइंड इंटरनेशनल होल्डिंग्स लिमिटेड (आईआईएचएल) ने लगाई है। सूत्रों के मुताबिक आईआईएचएल ने आरसीएल के अधिग्रहण के लिए 9,650 करोड़ रुपये की बोली लगाई है।
बोली की यह रकम नीलामी के पहले दौर में टॉरेंट इन्वेस्टमेंट्स की तरफ से लगाई गई 8,640 करोड़ रुपये की बोली से करीब 1,000 करोड़ रुपये अधिक है।
सूत्रों के मुताबिक, नीलामी के दूसरे चरण में शामिल होने की मंशा जताने वाली दो अन्य फर्मों- टॉरेंट इन्वेस्टमेंट्स और सिंगापुर की ओकट्री ने बोली प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया।
इस बारे में टिप्पणी के लिए हिंदुजा समूह को भेजे गए ईमेल का कोई जवाब नहीं मिला।
रिलायंस कैपिटल के ऋणदाताओं की समिति (सीओसी) ने दूसरे दौर की नीलामी के लिए 10,000 करोड़ रुपये का आधार मूल्य तय किया था। वहीं पहले दौर की नीलामी के लिए न्यूनतम बोली 9,500 करोड़ रुपये तय की गई थी।
सूत्रों ने कहा कि आईआईएचएल ने 9,650 करोड़ रुपये की समूची राशि को नकद में देने की बात कही है। सीओसी ने कम-से-कम 8,000 करोड़ रुपये का अग्रिम नकद भुगतान करने को कहा था।
उच्चतम न्यायालय से दोबारा नीलामी करने की मंजूरी मिलने के बाद बुधवार को दूसरे दौर की बोलियां लगाई गईं। हालांकि, न्यायालय के अंतिम फैसले पर ही दूसरे दौर की बोली प्रक्रिया का नतीजा निर्भर करेगा।
दरअसल, पहले दौर की नीलामी में सर्वाधिक बोली लगाने वाली टॉरेंट ने आईआईएचएल पर बाद में संशोधित बोली लगाने का आरोप लगाते हुए उसे न्यायालय में चुनौती दी हुई है। गत दिसंबर में संपन्न पहले दौर की नीलामी में आईआईएचएल ने पहले 8,110 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी लेकिन बाद में उसे संशोधित कर 9,000 करोड़ रुपये कर दिया था।
कर्जदाताओं ने उम्मीद के अनुरूप बोली नहीं मिलने पर दूसरे दौर की नीलामी करने का फैसला किया था जिसे राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने उचित ठहराया। अपीलीय न्यायाधिकरण के निर्णय को टॉरेंट ने न्यायालय में चुनौती दी थी लेकिन उसने कोई रोक लगाने से मना कर दिया था।
रिजर्व बैंक ने भुगतान में चूक और गंभीर परिचालन मुद्दों को ध्यान में रखते हुए 29 नवंबर, 2021 को रिलायंस कैपिटल के निदेशक मंडल को भंग कर दिया था। इसके साथ ही नागेश्वर राव वाई को प्रशासक नियुक्त कर दिवाला प्रक्रिया पूरा करने का जिम्मा भी सौंपा गया था।
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