नयी दिल्ली, 29 अगस्त दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को प्रमुख थिंक टैंक, ‘सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च’ (सीपीआर) की उस याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा, जिसमें कानूनों के कथित उल्लंघन पर उसके विदेशी चंदा विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) लाइसेंस के निलंबन को चुनौती दी गई है।
न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया और मामले की अगली सुनवाई की तिथि पांच सितंबर तय की।
उच्च न्यायालय ने केंद्र से पांच सितंबर तक सीपीआर की अर्जी पर फैसला करने को कहा, जिसमें उसकी निधि का 25 प्रतिशत जारी करने का अनुरोध किया गया है। अर्जी में कहा गया है कि संगठन ने अधिकारियों को कुछ स्पष्टीकरण दिए थे और इस बात को तीन महीने बीत चुके हैं लेकिन उसके अनुरोध पर अभी तक कोई आदेश पारित नहीं किया गया है।
केंद्र ने 27 फरवरी को संगठन के एफसीआरए लाइसेंस को निलंबित कर दिया था, जिसके बाद सीपीआर ने मार्च में अधिकारियों को एक अर्जी देकर उसके कर्मचारियों को वेतन देने के लिए उसकी जमा धनराशि में से 25 प्रतिशत जारी करने का अनुरोध किया था।
केंद्र की वकील ने कहा कि उन्होंने संगठन से कुछ स्पष्टीकरण मांगे थे जो 15 मई को सौंपे गये थे। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है और सरकार इस संबंध में काम कर रही है।
सीपीआर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने दलील दी कि लाइसेंस निलंबित करने का आदेश बिना किसी जांच के पारित किया गया था।
उन्होंने अनुरोध किया कि थिंक टैंक को अपने कर्मचारियों को वेतन देने में सक्षम बनाने के लिए अंतरिम उपाय के तहत धनराशि जारी की जाये, क्योंकि कर्मचारियों को पिछले छह महीने से भुगतान नहीं किया गया है।
गृह मंत्रालय ने वित्त पोषण कानूनों के कथित उल्लंघन को लेकर सीपीआर का एफसीआरए लाइसेंस निलंबित कर दिया है। सीपीआर का एफसीआरए लाइसेंस आखिरी बार 2016 में नवीनीकृत किया गया था और इसका 2021 में नवीनीकरण किया जाना था।
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