मुंबई, 26 जून बंबई उच्च न्यायालय ने विदेश यात्रा के लिए लुक आउट सर्कुलर (एलओसी) पर अस्थायी रूप से रोक लगाने के अनुरोध को लेकर अंतिम समय पर आवेदन दाखिल करने पर नाखुशी जताई और कहा कि इस तरह की परिपाटी स्वीकार्य नहीं है।
न्यायमूर्ति गौतम पटेल और नीला गोखले की खंड पीठ ने 23 जून के अपने आदेश में कहा कि अदालत से अनुमति का अनुरोध करने से पहले ही आवेदकों द्वारा अपने यात्रा कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया जाता है और इसके बाद आवेदन दायर किए जाते हैं।
अदालत ने कहा, ‘‘यहां सवाल यह नहीं है कि कोई अधिकार है जिसका उल्लंघन हुआ है। इन सभी आवेदनों में, ऐसा प्रतीत होता है कि अदालत के बारे में यह मान लिया गया कि उससे अनुमति मिल जाएगी। मामले को और अधिक महत्वपूर्ण है कि आवेदन को बिना बारी के प्राथमिकता के आधार पर लिया जाएगा और उनके यात्रा के कार्यक्रम को बरकरार रखते हुए आवेदन को स्वीकृति दे दी जाएगी।’’
पीठ ने कहा, ‘‘यह स्वीकार्य नहीं है।’’ पीठ ने अपने आदेश में कहा कि एलओसी पर रोक का अनुरोध करने वाले लोगों को समय रहते अदालत का रुख करने की जरूरत है और अदालतों पर ‘दबाव डालने का प्रयास नहीं’ करना चाहिए।
अदालत ने कहा कि जब अंतिम समय में आवेदन दायर किए जाते हैं तो यह ‘बहुत बाधा डालने वाला’ हो जाता है, क्योंकि आदेशों को पारित करना होता है, तुरंत प्रतिलेखित करना होता है और फिर हस्ताक्षर करने के बाद अपलोड करना होता है।
पीठ संजय दांगी की ओर से दायर एक आवेदन पर सुनवाई कर रही थी जिसमें विदेश यात्रा के लिए उनके खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की द्वारा जारी एलओसी पर अस्थायी रूप से रोक लगाने की अनुरोध किया गया था।
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